राजीव सिन्हा

राजीव सिन्हा

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम. ए. और एम. फिल. करने के पश्चात् दिल्ली में अध्यापन . साहित्य के अतिरिक्त भारतीय इतिहास और संस्कृति में विशेष रूचि

3 Comments

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

  1. ravikumarswarnkar
    मई 23, 2009 @ 7:29 अपराह्न

    अच्छी गंभीर शुरूआत है…
    महत्वपूर्ण कार्य….अभी उम्मीद कायम है…

    Reply

  2. abhishek kumar
    जनवरी 4, 2018 @ 7:51 पूर्वाह्न

    ब्लॉग पर अभी पढ़ी।बहुत अच्छा लगा पढ़कर पर गुरूजी थोड़े में ही निपटा दिए😒।खैर सही भी है,जहाँ लोग नॉवेल तक नहीं पढ़ पाते सही से वहां एक विमर्श पढ़ना संदेहास्पद है।तीन पारा में ही पूरा निचोड़ डालने की पूरी कोशिश की है।गुरूजी को साधुवाद।

    Reply

  3. chandan kumar
    जनवरी 11, 2018 @ 1:30 अपराह्न

    बहुत जल्द खत्म कर दिया , गुरूजी

    Reply

कॉपी नहीं शेयर करें !
%d bloggers like this: