राजीव सिन्हा

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम. ए. और एम. फिल. करने के पश्चात् दिल्ली में अध्यापन . साहित्य के अतिरिक्त भारतीय इतिहास और संस्कृति में विशेष रूचि

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अतिथि

वाह!! रोमांचक संस्मरण। आखिर हार के जीतने वाले को ही बाजीगर कहते हैं। आपने भी बाज़ीगरी दिखा ही दी। उम्मीद है ऐसे ही लेख आगे भी आते रहेंगे।

अतिथि
Alok verma

बेहद खूबसूरत संस्मरण। वाह वाह

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