राजीव सिन्हा

राजीव सिन्हा

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम. ए. और एम. फिल. करने के पश्चात् दिल्ली में अध्यापन . साहित्य के अतिरिक्त भारतीय इतिहास और संस्कृति में विशेष रूचि

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विकास नैनवालRajiv Sinha हालिया टिप्पणीकर्ता
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विकास नैनवाल
अतिथि

रोचक हास्य लेख। लेख आपको गुदगुदाता है। बाल मन और छोटे भाई बहन के बीच के रिश्ते को भी बहुत खूबसूरती से दर्शाया है। एक ऐसा ही लेख बड़े भाई बहनों द्वारा छोटे भाई बहनों पे ढाए अत्याचारों पे होता तो मज़ा आ जाता।
लेख में निम्न जगह 'मान' को मां किया गया है। उसे ठीक कर लीजियेगा।
'अम्मा! देखो भैया नहीं मां रहा है',यह भी समझ में नहीं आता कि कब मैं अचानक समझदार और जिम्मेदार मां लिया जाता हूँ और

Rajiv Sinha
अतिथि

ध्यानाकर्षण के लिए धन्यवाद. अपेक्षित सुधार कर दिए हैं.

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