राजीव सिन्हा

राजीव सिन्हा

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम. ए. और एम. फिल. करने के पश्चात् दिल्ली में अध्यापन . साहित्य के अतिरिक्त भारतीय इतिहास और संस्कृति में विशेष रूचि

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  1. विकास नैनवाल
    अक्टूबर 11, 2017 @ 6:28 पूर्वाह्न

    रोमांच से भरपूर कहानी। पढ़कर मज़ा आ गया। कहानी में विज्ञान के विष से ज्यादा महत्वाकांक्षा का विष है जो अंतरिक्ष में फैला। शायद यही बौद्धिक जीव होने का अभिशाप भी है।

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