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अतिथि

विजयदान देथा जी की भाषा शैली बहुत अच्छी थी। लोक कथाओं को जो साहित्य रूप दिया वह पठनीय है।
उनकी उक्त कथा काफी चर्चित रही है।
धन्यवाद।

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