भ्रमरगीत सार का विरह शृंगार

पढ़ें सिर्फ: 5 मिनट में आचार्य शुक्ल ने शृंगार को रसराज कहा है। कारण यह है कि  शृंगार रस के सहारे मनुष्य के सभी भावों को व्यंजित किया जा सकता है। यद्यपि सूरदास के यहाँ शृंगार के दोनों पक्षों संयोग और वियोग का चित्रण मिलता है, तथापि सूरदास का मन ज्यादातर वियोग वर्णन में ही रमा है। सूरदास का भ्रमरगीत […]

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