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कोन्फ्लिक्ट (टकराव/संघर्ष)

एक क्राइम उपन्यास या कहानी में ‘सस्पेंस’ का होना बहुत जरूरी होता है। इसे आप अपराध गल्प कथाओं का प्रमुख तत्व भी कह सकते हैं। नए लेखकों के लिए ‘अपराध गल्प कथा’ में सस्पेन्स डालना उतना आसान नही रहता है, हालांकि उनकी कोशिश पुरजोर रहती है, लेकिन कई बार वे इस मामले में चूक जाते हैं।

अगर आप अपनी कहानी में ‘सस्पेन्स’ डालना चाहते हैं तो किरदारों के बीच ‘कनफ्लिक्ट, टकराव, झगड़ा और संघर्ष’ को दिखा कर इसे आसानी से पा सकते हैं। दो प्रकार के ‘कनफ्लिक्ट’ आपकी कहानी में होने चाहिए – एक केंद्रीय टकराव एवं दूसरा छोटे-छोटे सहायक टकराव। जैसे कि किसी ‘डिटेक्टिव फिक्शन’ या ‘मर्डर मिस्ट्री’ उपन्यास के केंद्र में, कातिल की खोज होती है जिसने आपके एक किरदार का क़त्ल किया हो। आप इसके चारों ओर कई ‘कनफ्लिक्ट’ के ताने-बाने से सस्पेंस रच सकते हैं। ‘कत्ल किसने किया?’ – यह पहला प्रश्न ही सस्पेंस बनाने की पहली सीढ़ी होती है। यह एक ‘केंद्रीय टकराव’ का उदाहरण है। वहीं छोटे-छोटे कनफ्लिक्ट के जरिये आप पाठक के लिए सस्पेंस बना सकते हैं – जैसे कि – इन्वेस्टिगेटर जब दो ऐसे किरदारों से पूछताछ करता है – जो एक दूसरे से नफरत करते हैं – ऐसे में दोनों ही एक-दूसरे के ऊपर इल्ज़ाम लगाते हैं और एक-दूसरे के बारे में कई ऐसी बात कह जाते हैं, जिससे शक की सुई बार-बार दोनों के बीच, कभी इधर तो कभी उधर भागती रहती है।

वहीं, जब कोई किरदार, मृतक के पूर्व जीवन पर पर्दा डालने की कोशिश करता है और पूर्व जीवन के निशाँ मिटाता जाता है तब भी सस्पेंस क्रिएट होता है। वहीं जब कहानी का मुख्य किरदार तहकीकात करते हुए, जब किसी खतरे में पड़ जाता है तब भी पाठकों के लिए सस्पेंस क्रिएट होता है।

सस्पेन्स तब बनता है जब कोई घटना पाठकों को उत्कंठा की ऊंचाई पर लेकर जाता है। ऐसे में जब आपका ‘मुख्य किरदार’ एक दफा असफल हो जाता है, लेकिन फिर भी वह ‘सत्य’ को खोज निकालने के लिए प्रयासरत है, लेकिन पाठक को इस किरदार से, कि वह सफल होगा, बहुत उम्मीदें हैं तो किरदार के साथ सफर जारी रखते हैं। अपने अगले प्रयास में वह फिर असफल हो जाता है, यहाँ नाउम्मीदी का पहला झटका लगता है। इन दो झटकों से, जब आपका किरदार पाठकों की नज़रों  में तीसरी बार में असफल हो सकता है, जैसी जो सोच बनती है,  लेकिन वह जब तीसरी बार सफल हो जाता है, तब सस्पेंस के बारे में पाठक को खबर होता है| हमारे लिए एक बार नही, दो बार मुख्य किरदार को असफलता दिखा कर जो आपने तीसरा झटका दिया उसके बाद पाठक पक्का यही सोचेगा की क्या शानदार सस्पेंस था।

इसके अलावा कई बार, कनफ्लिक्ट जिनके बारे में हमने ऊपर बात की, वह बाहरी होने में बजाय अंदुरिणी हो अर्थात आपके उपन्यास का मुख्य किरदार किसी प्रकार के मानसिक चिंतन से गुजर रहा है। यह मानसिक चिंतन कुछ भी और कैसा भी हो सकता है, जो कि कहानी के अनुसार बनता है।

एक बेहतरीन क्राइम फिक्शन के पीछे जो शक्ति होती है, वह सस्पेंस की होती है और सस्पेंस क्रिएट करने का सबसे बेहतरीन हथियार ‘कॉन्फ्लिक्ट’ होता है।

#amwriting

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सस्पेंस लेखन #१
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