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लेखन के विधा में वैसे तो कुछ भी स्टेटिक नहीं है, नियम बनते एवं बदलते रहते हैं। कई लेखक अपने नियम बनाते हैं तो कई दूसरों के नियमों को फॉलो करते हैं। फिर भी कुछ ऐसी बातें हैं, कुछ ऐसी गलतियाँ हैं, जो किसी लेखक द्वारा नहीं की जानी चाहिए। हम बात करने जा रहे हैं, उन गलतियों की जो, उपन्यास लेखन के दौरान पहले अध्याय में नहीं करनी चाहिए।

पहली बात, उपन्यास के पहले अध्याय की ओपनिंग लाइन ऐसी होनी चाहिए की पाठक का दिमाग अपने आपसे प्रश्न करने लग जाए कि आगे क्या होगा। बोरिंग लाइन्स से दूर रहना चाहिए, जैसे कि – वह सोकर जगा/जगी, उसने अपनी कार से बाहर कदम रखा। कुछ ऐसी ग्रिप्पिंग लाइन होनी चाहिए की पाठक के दिमाग की बत्ती जलने लग जाए।

वहीँ, इस बात का ध्यान रखने की भी जरूरत है कि पहले अध्याय में हम अत्यधिक किरदारों को भी प्रवेश नहीं कराना चाहिए। वहीँ फोर्मटिंग करते वक़्त ध्यान देने की भी जरूरत है कि संवादों को लिखते वक़्त किस प्रकार का फॉर्मेट रखना चाहिए, किरदार के सोच को दर्शाते वक़्त कैसा फॉर्मेट होना चाहिए आदि। वहीँ हमेशा किरदार के वर्तमान से जुड़ी घटनाओं को ही बढ़ावा मिलना चाहिए, पूर्वाभास वाले हिस्से को कम से कम और तब इस्तेमाल करना चाहिए जब लगे कि हाँ अब इसकी जरूरत है।

किसी भी उपन्यास का पहला अध्याय ही पाठकों के बीच उसकी पाठकीयता को निर्धारित करता है, यही कारण है कि ‘क्राइम फिक्शन’ उपन्यास जिनमे यह खूबी होती है, आज के समय में सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली विधा है।

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