हजारी प्रसाद द्विवेदी

हजारी प्रसाद द्विवेदी

जन्म 19 अगस्त 1907 में बलिया जिले के 'दुबे-का-छपरा' नामक ग्राम में. प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल में.शांति निकेतन में कई वर्षों तक हिंदी विभाग में कार्य करते रहे. हिंदी, अंग्रेज़ी, संस्कृत और बांग्ला भाषाओं के विद्वान थे. हिन्दी साहित्य के ऐतिहासिक रूपरेखा पर ऐतिहासिक अनुसंधानात्मक कई संग्रह लिखे.मध्ययुगीन संत कबीर के विचारों, कार्य और साखियों पर उनका शोध एक उत्कृष्ट कार्य माना जाता है. उन्होंने बाणभट्ट की आत्मकथा, अनामदास का पोथा, पुनर्नवा, चारु चन्द्रलेख जैसे उपन्यासों की रचना की, जिन्हें इतिहास आश्रित रोमांस की संज्ञा दी जाती है. नाखून क्यों बढते हैं, अशोक के फूल, कुटजआदि उनके उल्लेखनीय निबंध हैं.

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