विकास नैनवाल

विकास नैनवाल

कहते हैं इश्क और मुश्क छुपाये नहीं छुपता। यह बात मेरे लिए भी बचपन में ही चरित्रार्थ हो गयी थी। किस्से और कहानियों से मुझे बचपन से ही इश्क हो गया था। फिर यह मायने नहीं रखता था कि वह किस्से किस शैली हैं। गम्भीर हो या पल्प हर तरह के किस्से मुझे पढ़ना पसंद है। अगर कुछ न मिले तो खाली लिफ़ाफ़े और चीजों में चिपके स्टीकर पढ़कर भी मैंने पढ़ने की अपनी इस आदत को पूरा करता रहा हूँ। किताबों को क्यों पढ़ता हूँ? इसका जवाब मैं कुछ इस तरह देना चाहूँगा: जब भी किताबों के पन्ने पलटता हूँ , कई किरदारों से रूबरू हो जाता हूँ , कुछ में अपनों को, तो कुछ में दूसरों को पाता हूँ, एक किताब के जरिये मैं न जाने कितनी जिंदगियाँ जी जाता हूँ - विकास 'अंजान' पेशे से एक प्रोग्रामर हूँ। लेकिन स्वभाव से घुमक्कड़ और किस्से कहानियों का दीवाना। अपने इन दोनों शौकों को पूरा करने में ही हमेशा लगा रहता हूँ।

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