सिद्धार्थ अरोड़ा 'सहर'

सिद्धार्थ अरोड़ा 'सहर'

सिद्धार्थ अरोड़ा 'सहर' यूँ तो रहते दिल्ली में हैं, लेकिन अपने घर 'अमृतसर' से कभी अपना हाथ छुड़ा नहीं पाए । अक्सर नई किताबें खरीद कर पढ़नी शुरू कर देते हैं, अगर आधी पढ़ने के बाद समझ न आए या पसंद न आए तो वहीं छोड़ कर दूसरी किताब पढ़ने लग जाते हैं । किताबें पढ़ते पढ़ते जाने क्या सूझी कि खुद एक नॉवेल लिखनी शुरू कर दी । आने वाले समय में क्या बनना चाहते हैं ये बताना तो मुश्किल है पर लिखना चाहते हैं, ये पक्का है चाहें वो किसी भी श्रेणी में हो । फ़िलहाल प्राइवेट नौकरी बजा रहे हैं और सरकारी से दूरी बनाए हुए हैं । किस्से कहानियों के अलावा कुछ एक फ़िल्मी/किताबी रिव्यु भी लिखते हैं ।

रचनाएँ