अध्याय १५ : हरप्रकाश लाल का मकान पहले कही हुई कार्यवाई करके मकान लौटने में देर हो जाने से मुंशी जी अन्दर महल में न जाकर बैठक में ही सो रहे। बड़ी मेहनत के बाद अधिक रात गए, सोने के कारण, आज सबेरे सात बजे उनकी नींद खुली। उठकर वे भीतर गए – चौक […]
हत्या और आत्महत्या, हम इन दोनों शब्दों से भली-भांति परिचित हैं। दैनिक जीवन में, इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया के जरिये, हम कई ऐसे अपराधिक घटनाओं के बारे में जानते हैं, जिसमे इन दोनों टर्म का इस्तेमाल होता है। क्राइम फिक्शन पढने वाले कई पाठकों को भी इसके बारे जानकारी होती है। आपने अक्सर देखा होगा […]
‘लफ़्ज़ों से बनते किस्से’ ‘लफ़्ज़ों से बनते किस्से’ इस पेज पर शुरू की जा रही नयी ‘प्रतियोगिता’ है। इस प्रतियोगिता में, SWCCF के वेबसाइट पर, प्रतियोगिता सेक्शन में, ‘लफ़्ज़ों से बनते किस्से’ पेज पर, एक इमेज के जरिये, आप सभी के सामने हम ‘एक वाक्य या एक पंक्ति’ रखेंगे – प्रतियोगी को इसी ‘वाक्य या […]
अध्याय १४ : पातालपुरी हीरा सिंह जब ठाकुर जी की आरती लेकर लौटा तबतक एक पहर दिन चढ़ गया था। अभी तक भोला राय वहीँ पर उसी तरह बैठा था। हीरा सिंह ने सोचा कि भोला का ढंग अच्छा नहीं है, इस समय उसको हाथ में न रखने से पीछे आफत आवेगी। यह सोचकर उसने […]
शरलॉक होम्स : द परफेक्ट डिटेक्टिव वर्तमान में, शरलॉक होम्स को सोचे बगैर क्राइम फिक्शन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। आर्थर कॉनन डायल द्वारा रचित यह किरदार विश्व में क्राइम फिक्शन का प्रतीक बन चुका है। शरलॉक होम्स को समर्पित कई, अन्तराष्ट्रीय
अध्याय १३ : ठाकुरबाड़ी सबेरा हो गया है लेकिन अभी तक कहीं-कहीं अँधेरा है। इसी समय “सियाराम” – “सियाराम” कहकर प्रसिद्ध पुण्यात्मा हीरासिंह ने चारपाई से उठकर जमीन पर पैर रक्खा। वह इधर-उधर घूमकर एक पत्थर की वेदी के पास आ खड़ा हुआ। देखा वेदी पर भोलाराय
कोन्फ्लिक्ट (टकराव/संघर्ष) एक क्राइम उपन्यास या कहानी में ‘सस्पेंस’ का होना बहुत जरूरी होता है। इसे आप अपराध गल्प कथाओं का प्रमुख तत्व भी कह सकते हैं। नए लेखकों के लिए ‘अपराध गल्प कथा’ में सस्पेन्स डालना उतना आसान नही रहता है, हालांकि उनकी कोशिश पुरजोर रहती है
अध्याय १२ : गंगा की धारा छठ की रात तीन घड़ी बीत गयी है। डोरा के पास जंगल की नाहर से एक छोटी सी नाव निकलकर गंगा जी में आई। हीरासिंह के डाकुओं में से अबिलाख बिन्द, सागर पांडे, बुद्धन मुसहर तथा और दो आदमी उस पर सवार हैं। सागर पांडे ने जम्हाई ली और […]
प्राइवेट डिटेक्शन एडगर एलन पो को कई लोग ‘क्राइम फिक्शन का जनक’ तो कई ‘ डिटेक्शन फिक्शन का पिता’ कहते हैं। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने तर्कसंगत विश्लेषण का प्रयोग करते हुए,