मौन रात इस भांति कि जैसे, कोई गत वीणा पर बज कर, अभी-अभी सोई खोई-सी, सपनों में तारों पर सिर धर और दिशाओं से प्रतिध्वनियाँ, जाग्रत सुधियों-सी आती हैं, कान तुम्हारे तान कहीं से यदि सुन पाते, तब क्या होता? तुमने कब दी बात रात के सूने में तुम आने वाले, पर ऐसे ही वक्त […]
जिस तरह प्रसाद ,पंत,महादेवी और निराला छायावाद के चार स्तंभ थे उसी प्रकार केदार नाथ अग्रवाल,त्रिलोचन,शमशेर और नागार्जुन प्रगतिवादी कविता के चार स्तंभ माने जा सकते हैं। इनमें नागार्जुन की न सिर्फ काव्ययात्रा सबसे लंबी रही है,बल्कि उनका काव्य संसार भी काफी वैविध्यपूर्ण रहा है। जनता से जुड़े हर सवाल पर जनता का साथ देकर […]
रात आधी खींच कर मेरी हथेली एक उंगली से लिखा था प्यार तुमने। फ़ासला था कुछ हमारे बिस्तरों में और चारों ओर दुनिया सो रही थी। तारिकाऐं ही गगन की जानती हैं जो दशा दिल की हमारे हो रही थी। मैं तुम्हारे पास होकर दूर तुमसे अधजगा सा और अधसोया हुआ सा। रात आधी खींच […]
सरोज स्मृति एक शोकगीति है, जो निराला ने अपनी पुत्री सरोज की मृत्यु के पश्चात लिखी थी।कवि अन्यत्र कहता है-‘गीत गाने दो मुझे तो वेदना को रोकने को’। यहाँ भी कवि अपनी पुत्री, जो उसके जीवन का एकमात्र सहारा थी’ की मृत्यु से उत्पन्न वेदना को कविता के माध्यम से कम करना चाहता है।पुत्री कवि […]