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हिमाद्रि तुंग श्रृंगिनी

त्रिरंग-रंग रंगिनी

नमामि मातु भारती

सहस्त्र दीप आरती !

 

समुद्र पाद पल्लवे

विराट-विश्व वल्लभे

प्रबुद्ध बुद्ध की धरा

प्रणम्य है वसुंधरा !

 

स्वराज्य स्वावलम्बिनी

सदैव सत्य-संगिनी

अजेय, श्रेय-मंडिता

समाज-शास्त्र पंडिता !

 

अशोक चक्र-संयुते

समुज्जवले, समुन्नते

मनोज्ञ मुक्ति-मंत्रिणी

विशाल लोक-तंत्रिणी !

 

अपार शस्य-सम्पदे

अजस्त्र श्री पदे-पदे

शुभंकरे प्रियम्वदे

दया-क्षमा वंशवदे !

 

मनस्विनी तपस्विनी

रणस्थली यशस्विनी

कराल काल-कालिका

प्रचंड मुंड-मालिका !

 

अमोघ शक्ति-धारिणी

कराल कष्ट-वारिणी

अदैन्य मंत्र दायिका

नमामि राष्ट्र नायिका !

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राजीव सिन्हा

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर के बाद दिल्ली में अध्यापन
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