अज्ञेय

‘अज्ञेय’ सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन का छद्म नाम है। 7 मार्च 1911 को कसया (उ॰प्र॰) के निकट एक पुरातात्विक उत्खनन शिविर मे जन्मे अज्ञेय प्रेमचंद के द्वारा विकसित सामाजिक यथार्थवादी कथाधारा को अपनी प्रतिभा के दम पर व्यक्तिवाद और मनोविश्लेषणवाद की ओर मोड़ देते हैं। तारसप्तक के संपादक के रूप मे वे प्रयोगवादी कविता के प्रवर्तक के रूप मे उभरते हैं।

        उनका ‘शेखर : एक जीवनी’ एक युग प्रवर्तक उपन्यास के रूप मे जाना जाता है।  कई लोगों का मानना है कि शेखर की कहानी काफी हद तक  उनके अपने जीवन की कथा है। उन्होने शेखर : एक जीवनी को एक विद्रोही की आत्मकथा के रूप मे रचा है।’नदी के द्वीप’ और ‘अपने अपने अजनबी’ उनके अन्य उपन्यास हैं। अज्ञेय ने विपथगा, परंपरा, शरणार्थी, कोठरी की बात और जयदोल जैसी कहानियों की भी रचना की है।

         भग्नदूत, इत्यलम, हरी घास पर क्षण भर, बावरा अहेरी, आँगन के पार द्वार आदि उनके महत्वपूर्ण कविता संग्रह हैं। उनकी कविताओं का संकलन ‘सदानीरा’ के रूप मे प्रकाशित हुआ। इसके अतिरिक्त उन्होने ‘अरे यायावर रहेगा याद’ तथा  ‘एक बूंद सहसा उछली’ जैसे यात्रा वृतांत भी लिखे। 4 अप्रैल 1987 को उनका देहांत हो गया।

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