हमको बचपन से ही सिखाया जाता है कि कभी किसी के साथ बुरा मत करो क्योंकि ईश्वर सब देख रहा होता है और इसके अलावा हमको बचपन से ये भी सिखाया जाता है कि बुरे कर्मों के फल हमको इसी जन्म में मिलते हैं लेकिन अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर मैं ये कह सकता […]
कोडवर्ड की शिकार कोख रोहित मीणा नालायक अमित कुलश्रेष्ठ मौत की चिट्ठी आनंद सिंह इश्क दी जात आलोक बंसल एक कहानी भूली सी ठाकुर महेश सिंह जिन्नात सईद अयूब गुलनार डॉली परिहार घनगरज मनु दुग्गल जानवराधिकार प्रेम एस गुर्जर ब्याहता सुनीता सिंह दलित समर्थन, कानूनी घमर्थन शिवेश आनंद धरोहर मीनाक्षी चौधरी फटीचर परमाणु सिंह जिगर […]
घंटी की आवाज सुनते ही खेल के मैदान में भगदड़ मच गई. लड़के खेल छोड़कर अपने कमरों की और भागे. अशोक तो ‘कबड्डी-कबड्डी’ करता हुआ ही अपने कमरे में पहुँच गया. डेस्क के नीचे पड़े हुए जूते पहनने के लिए वह जैसे ही झुका, उसकी नजर अपनी पुस्तक पर पड़ी. पुस्तक औंधे मुँह पड़ी थी. […]
क्राइम फिक्शन, विश्व भर में सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली विधा है। हर वर्ग का पाठक इस विधा को कभी न कभी पढ़ता ही है। आप और हम देखते हैं कि अनेकानेक भाषाओं में विश्वस्तरीय क्राइम फिक्शन पुस्तकों का अनुवाद होता और वे बड़े चाव से पढ़े जाते हैं। ईबुक की दुनिया में तो प्रतिदिन […]
विष्णु खरे को श्रद्धांजलि स्वरूप 1947 के बाद से इतने लोगों को इतने तरीकों से आत्मनिर्भर मालामाल और गतिशील होते देखा है कि अब जब आगे कोई हाथ फैलाता है पच्चीस पैसे एक चाय या दो रोटी के लिए तो जान लेता हूँ मेरे सामने एक ईमानदार आदमी, औरत या बच्चा खड़ा है मानता हुआ […]
महावीर प्रसाद द्विवेदी द्वारा संपादित ‘सरस्वती’ (सितंबर 1914) में प्रकाशित यह कविता हिंदी दलित साहित्य की पहली रचना मानी जाती है. हमनी के राति दिन दुखवा भोगत बानी हमनी के सहेब से मिनती सुनाइबि। हमनी के दुख भगवानओं न देखता ते, हमनी के कबले कलेसवा उठाइबि। पदरी सहेब के कचहरी में जाइबिजां, बेधरम होके रंगरेज […]
एक रीडर के तौर पर आपने किसी भी पुस्तक को स्टार्ट करने के बाद महसूस किया होगा कि किसी पुस्तक का पहला चैप्टर ही रीडर के मन मे उस पुस्तक को खत्म करने का बीज बो देता है। एक लेखक के तौर पर भी अमूमन यही सलाह वरिष्ठ लेखकों से मिलती है कि वे पहले […]
“तू झूठ बोलता है, साले!” – सब इंस्पेक्टर दिनेश राठी के होठों से निकलता यह शब्द गौरव प्रधान के लिए किसी रिवाल्वर से निकली गोली के समान था। “तूने ही अपने पिता का क़त्ल किया है। बता क्यूँ किया अपने बाप का खून, किसलिये किया, कैसे किया, बता।” – दिनेश राठी फिर चिल्लाया। उसकी आँखें […]
ख़ुर्शीद में जल्वा चाँद में भी । हर गुल में तेरे रुख़सार की बू । घूँघट जो खुला सखियों ने कहा । ऐ सल्ले अला, अल्लाहो ग़नी, अल्लाहो ग़नी । दिलदार ग्वालों, बालों का । और सारे दुनियादारों का । सूरत में नबी सीरत में ख़ुदा । ऐ सल्ले अला, अल्लाहो ग़नी, अल्लाहो ग़नी । […]