विनय प्रकाश तिर्की

विनय प्रकाश तिर्की

श्री विनय प्रकाश तिर्की, छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ शासकीय अधिकारी हैं । श्री तिर्की समसामयिक विषयों में गहरी पकड़ रखते हैं । देश-विदेश घूम कर संस्कृतियों के गहन अध्ययन, उनकी सामाजिक सोच, राजनैतिक स्थितियों, उनकी परंपराएं और उनके पीछे की वजहों को जानने की उत्कंठा से प्रेरित श्री तिर्की, साल के दो माह, अपनी छुट्टियों में यायावर हो जाते हैं । "मैं हमेशा यात्रा पर रहना चाहता हूँ, चाहता हूँ कि वो दुनिया जिसमें रहने के लिए ईश्वर ने हमें भेजा, अधिक से अधिक देख ली जाए। जब ईश्वर मुझसे मेरे पाप-पुण्य का हिसाब पूछेगा, तब मैं उसे कहना चाहता हूँ कि आपने मनुष्य को बहुत छोटा जीवन दिया, इतना छोटा कि जितने में वो आपकी बनाई पूरी दुनिया भी नहीं देख सकता, क्योंकि उसे इस दरमियान पाप और पुण्य भी तो करने होते हैं ताकि वो आपके बहीखातों में अपना नाम दर्ज करा सके। मैं अपनी यात्राओं को यात्रा कहना ही पसंद करता हूँ, ना कि पर्यटन, क्योंकि एक यात्री वो देखता है जो दिख रहा होता है, जबकि एक पर्यटक वो देखता है जो वो देखने आया है। यात्राएँ हमेशा कुछ नया सिखाती हैं, जैसे कि सेंट अगस्टाईन ने कहा था ‘‘दुनिया एक किताब की तरह है और जो यात्रा नहीं करते हैं वे केवल किताब के पेज गिनते हैं’’, तो मैं सिर्फ पेज गिनने में जीवन व्यर्थ नहीं करना चाहता, बल्कि पूरी किताब पढ़ना चाहता हूँ। अगर विज्ञान फंतासियां कभी मेरे जीवनकाल में सच हुईं तो मैं किताबों की लायब्रेरी अर्थात अंतरिक्ष की भी यात्रा करना चाहूँगा। मैंने कई देशों की यात्राएँ की, जो दिखा वो देखा, ना कि वो जो मैं देखना चाहता था, इसलिए मेरे यात्रा संस्मरणों में अधिकांशतः लीक से हटकर स्थानों का उल्लेख होता है, मैं इसके लिए कभी आलोचना भी झेल चुका हूँ, खासतौर से पाकिस्तान के यात्रा संस्मरण पर। यहाँ मैं बारी-बारी से अपने कुछ देशों की यात्रा का संस्मरण आपके समक्ष रख रहा हूँ, आशा करता हूँ कि आपको पसंद आएंगें।"

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