सालों बाद मुझे एक शादी में सम्मिलित होने का अवसर मिला। अपने गांव, अपने रीति रिवाजों से परिपूर्ण शादियों का अलग ही मजा है। सारे रिश्तेदार-नातेदारों से मिलने का और ढ़ोल थापों पर गीत-गवनई के सगल का अलग ही आनंद है। उसपर ये शादी हमारे रिश्ते के लड़के का था,ये जानते ही मेरा दिल बल्लियों […]
गांव जाने पर जो सबसे पहला चेहरा सामने आता है वो है हमारे “शिवबचन ठाकुर” का पौढ़ अवस्था की ओर अग्रसर शिबच्चन कांपते हाथ भी हमारे हर मांगलिक कार्यक्रम में इस ठसक से शामिल होते हैं कि क्या बताएं अम्मा कहीं लोकाचार भूल भी जाएं तो चट से अम्मा को टोकते हैं “ह नु! रवा […]