प्रेमचंद

31 जुलाई 1880 को वाराणसी के निकट लमही ग्राम में जन्मे धनपत राय श्रीवास्तव उर्फ नवाब राय साहित्य संसार मे प्रेमचंद के नाम से ख्यात हुए। हिन्दी उपन्यास के विकास मे उनके योगदान के कारण बांग्ला उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हे उपन्यास सम्राट की उपाधि दी। प्रेमचंद ने अपना आरंभिक लेखन उर्दू में किया । 1910 में प्रकाशित सोज़ ए वतन के लिए बलिया के जिला कलक्टर से चेतावनी मिली। सोज़ ए वतन की प्रतियाँ भी जब्त कर जला दी गईं। इसके बाद ‘जमाना’ के संपादक और अपने मित्र दयानारायण निगम की सलाह पर प्रेमचंद नाम अपनाया।हिन्दी में प्रेमचंद की पहली कहानी ‘सौत’ सरस्वती पत्रिका के दिसंबर 1915 के अंक मे प्रकाशित हुई। इसके बाद 1936 में अपनी मृत्यु होने तक प्रेमचंद ने 300 से अधिक कहानियाँ लिखीं। उनकी कहानियों का संकलन मानसरोवर के नाम से 8 भागों में प्रकाशित हुआ। सेवासदन हिन्दी मे प्रेमचंद का पहला उपन्यास है।

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अतिथि
chandan kumar chhawindra

बहुत बढिया कहानी

अतिथि
Abhishek Kumar

टॉलस्टॉय की कहानियाँ, जो प्रेमचंद द्वारा अनूदित हो,उन्हें पढ़ने का बहुत मन था।प्रेमचंद एक महान कथाकार ही नहीं,एक अच्छे अनुवादक भी थे।ऊपर से उन्होंने इस कहानी को तो भारतीय रंग में भी रंग दिया।बहुत बढ़िया।उपलब्ध कराने के लिए धन्यवाद।

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