राजीव सिन्हा

राजीव सिन्हा

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम. ए. और एम. फिल. करने के पश्चात् दिल्ली में अध्यापन . साहित्य के अतिरिक्त भारतीय इतिहास और संस्कृति में विशेष रूचि

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संगीता पुरी
अतिथि

बहुत सुंदर…आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

ई-गुरु राजीव
अतिथि

आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है. आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है , उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ 'ब्लॉग्स… और पढ़ें »

ई-गुरु राजीव
अतिथि

हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

शुभकामनाएं !

ब्लॉग्स पण्डित – ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

प्रकाश बादल
अतिथि

औरतों को पुरुषों के समान अधिकार देने की जैसे ही संसद और बुद्धिजीवी वर्ग ने वकालत की हमारे देश की युवतियों ने सबसे पहले अश्लीलता को समानता के रूप में मान लिया यही कारण है कि आज स्त्रियां और युवतियां समाज में हवस के शिकार भेड़ेयों का शिकार हो रही है लेकिन स्मानता तो अपने बौद्धिक स्तर को ऊंचा करने से होगी। प्रतिभा पाटिल ,सुनीता विलियम्स किरण बेदी लक्ष्मी बाई, सानिया मिर्ज़ा, आदि, आदि महिलाएं हैं जिन्हें उदाहरण मानकर चल सकते हैं कि इन्होंने ही समानता के लिए एक पाक रास्ता अख़्तियार किया न कि अपने जिस्म की नुमाईश की।… और पढ़ें »

Nirmla Kapila
अतिथि

aapka vichaar achha laga.agar nari age barhna chahti hai to kya khoya kya paya ka hisaab lagana prega nahi to is andhi daur me apna sab kuchh kho bethegi

masijeevi
अतिथि

आपसे अनुरोध है कि कृपया फांट का आकार बढ़ा लें इतना बारीक पढ़ने में तकलीफ होती है।

आपका स्‍वागत है

सुजाता
अतिथि

अच्छा लिखा ! एक सवाल है बस!200 साल पहले के नारीवाद और अब तक के पड़ावों से कितनी स्त्रियाँ परिचित हैं?मुझे नही लगता कि मुट्ठी भर से ज़्यादा संख्या ऐसी स्त्रियों की होगी।
दर असल यह नारीवाद का भटकाव नही, नारीवाद के व्यापक विरोध का परिणाम है।यह पूंजीवाद और पितृसत्ता की मिली जुली फौज वर्सिज़ स्त्री विमर्श है।

Mired Mirage
अतिथि

आप विमर्श कर रहे हैं यही बड़ी बात है। उसकी दिशा तो समय तय करता जाएगा।
घुघूती बासूती

Abhishek
अतिथि

नारियों को ख़ुद ही वस्तुस्थिति को समझना चाहिए . अन्यथा वो यूँ ही छली जाती रहेगी. स्वागत मेरे ब्लॉग पर भी.

RAJIV SINHA
अतिथि

सुझावों के लिये राजीव जी एव मसिजीवी जी का धन्यवाद। वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दिया है। फ़ॉन्ट का आकार बढ़ा दिया है। सुजाता जी के प्रश्नों पर विस्तार से चर्चा अगले पोस्ट में।

रचना गौड़ ’भारती’
अतिथि

नववर्ष् की शुभकामनाएं
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
http://www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लि‌ए देखें
http://www.chitrasansar.blogspot.com

विक्की
अतिथि
विक्की

वाह 👌 स्पष्ट और सही बात स्वतंत्रर्ता और भटकाव की बारीक़ सी लाइन दिखाती है ये लेख |
गुरूजी 👌👌👌

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