अन्नपूर्णानंद वर्मा

अन्नपूर्णानंद वर्मा

जन्म- 21 सितम्बर, 1895; मृत्यु- 4 दिसम्बर, 1962) हिन्दी में शिष्ट हास्य लिखने वाले कलाकारों में अग्रणी थे। ये 22 वर्ष की आयु में साहित्य के क्षेत्र में आए, और इनका पहला निबंध- 'खोपड़ी' प्रसिद्ध हास्यपत्र 'मतवाला' में प्रकाशित हुआ। उन्होंने प्रमुखत: कहानियाँ लिखी हैं, जिनमें हास्य की योजना भाषा के स्तर और परिस्थितियों की विडम्बना पर आधारित है। इन्होंने हिंदी के शिष्ट हास्य रस के साहित्य को ऊँचा उठाया।अन्नपूर्णानन्द काशी, उत्तर प्रदेश के निवासी थे। उन्होंने अधिकांश कहानियों में काशी नगर के वातावरण को मूर्तिमान किया है।रचनाएँ 'मनमयूर' 'मेरी हजामत' 'मंगलमोद' 'मगन रहु चोला' 'महाकवि चच्चा' (1932 ई.) 'पं. विलासी मिश्र'

2
आपके विचार

पोस्ट पर अपने विचार अवश्य दें.

  सब्सक्राइब करें  
सबसे नया सबसे पुराना सबसे ज्यादा वोट वाला
सूचित करें
विक्की
अतिथि
विक्की

😂जबरदस्त छोटा झाड़ू हा हा हा
एक जगह “कमी” के जगह ‘कभी’ होगया
जब बोलते है की फुरसत की मेरे पास कौन सी कभी है
शायद यहा “कमी” आना चाहिए होगा

बाकि जबरदस्त बहुत हंसी आई
जब वो दुकान में इंतजार करता हो
या जब नाइ उन्हें गुनाहो को याद करते बोला हो
सभी दृश्य जबरदस्त हास्य से भरपूर ❤❤❤

Do NOT follow this link or you will be banned from the site!
कॉपी नहीं शेयर करें !
%d bloggers like this: