सुदर्शन

सुदर्शन

सुदर्शन का वास्तविक नाम बदरीनाथ है। इनका जन्म सियालकोट में 1895 में हुआ था। वे प्रेमचंद की परंपरा के कहानीकार हैं। प्रेमचन्द के समान वह भी ऊर्दू से हिन्दी में आये थे। लाहौर की उर्दू पत्रिका हज़ार दास्ताँ में उनकी अनेकों कहानियां छपीं। उनकी पुस्तकें मुम्बई के हिन्दी ग्रन्थ रत्नाकर कार्यालय द्वारा भी प्रकाशित हुईं। "हार की जीत" सुदर्शन की पहली कहानी है,जो 1920 में सरस्वती में प्रकाशित हुई।मुख्य धारा के साहित्य-सृजन के अतिरिक्त उन्होंने अनेकों फिल्मों की पटकथा और गीत भी लिखे हैं। सोहराब मोदी की सिकंदर (१९४१) सहित अनेक फिल्मों की सफलता का श्रेय उनके पटकथा लेखन को जाता है। सन १९३५ में उन्होंने "कुंवारी या विधवा" फिल्म का निर्देशन भी किया। वे १९५० में बने फिल्म लेखक संघ के प्रथम उपाध्यक्ष थे। वे १९४५ में महात्मा गांधी द्वारा प्रस्तावित अखिल भारतीय हिन्दुस्तानी प्रचार सभा वर्धा की साहित्य परिषद् के सम्मानित सदस्यों में थे। उनकी कहानियों में हारजीत,तीर्थ-यात्रा, पत्थरों का सौदागर, पृथ्वी-वल्लभ, कवि की स्त्री आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। फिल्म धूप-छाँव (१९३५) के प्रसिद्ध गीत तेरी गठरी में लागा चोर, बाबा मन की आँखें खोल आदि उन्ही के लिखे हुए हैं।

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