आखिर को लैला की माँ ने मंजूर कर लिया, कहा – “अब लैला को मजनू के हाथ ही सौंप दूँगी!” सुननेवाले इस समाचार से खुश हो गए। लोगों ने लैला की माँ को बधाइयाँ दीं। मजनू बेचारा कितनी मुद्दत से लैला के पीछे तड़प रहा था। आशिकी के कारण इस दुनिया और उस दुनिया दोनों […]
पिछला अध्याय पढ़ें बयान – 1 इस आदमी को सभी ने देखा मगर हैरान थे कि यह कौन है, कैसे आया और क्या कह गया। तेजसिंह ने जोर से पुकार के कहा – ‘आप लोग चुप रहें, मुझको मालूम हो गया कि यह सब ऐयारी हुई है, असल में कुमारी और चपला दोनों जीती हैं, […]
पिछला भाग यहाँ पढ़ें इक्कीसवां बयान दूसरे दिन महाराज जयसिंह दरबार में बैठे हरदयालसिंह से तेजसिंह का हाल पूछ रहे थे कि अभी तक पता लगा या नहीं, कि इतने में सामने से तेजसिंह एक बड़ा भारी गट्ठर पीठ पर लादे हुए आ पहुँचे। गठरी तो दरबार के बीच में रख दी और झुक कर […]
शेखचिल्ली एक दिन अपने घर के सामने अहाते में बैठे भुने हुए चने खा रहे थे और साथ ही जल्दी-से-जल्दी अमीर बनने के सपने देख रहे थे. खुली आँखों से सपने देखते हुए कुछ चने खा रहे थे और कुछ नीचे गिरा रहे थे. संयोग से जमीन पर गिरे चने के दानों में एक दाना […]
पिछला भाग यहाँ पढ़ें ग्यारहवां बयान क्रूरसिंह को बस एक यही फिक्र लगी हुई थी कि जिस तरह बने वीरेंद्रसिंह और तेजसिंह को मार डालना ही नहीं चाहिए, बल्कि नौगढ़ का राज्य ही गारत कर देना चाहिए। नाजिम को साथ लिए चुनारगढ़ पहुँचा और शिवदत्त के दरबार में हाजिर होकर नजर दिया। महाराज इसे बखूबी […]
बयान -1 शाम का वक्त है, कुछ-कुछ सूरज दिखाई दे रहा है, सुनसान मैदान में एक पहाड़ी के नीचे दो शख्स वीरेंद्रसिंह और तेजसिंह एक पत्थर की चट्टान पर बैठ कर आपस में बातें कर रहे हैं। वीरेंद्रसिंह की उम्र इक्कीस या बाईस वर्ष की होगी। यह नौगढ़ के राजा सुरेंद्रसिंह का इकलौता लड़का है। […]
अनाज की पैदावार बढ़ी या नहीं, यह तो ईश्वर जाने या महंगाई, मगर हाकिमों की पैदावार का क्या कहना. कोई ए.ओ., बी.ओ., सी.ओ. हैं तो कोई ए.बी.ओ., बी.सी.ओ., सी.डी.ओ. और न जाने कितने ‘ओ’ हैं कि अंग्रेज़ी वर्णमाला के भी होश गुम हैं कि अब ओ के साथ कौन से अक्षर जोड़े जाएँ. उस पर […]
शेखचिल्ली अपने घर के बरामदे में बैठे-बैठे खुली आँखों से सपने देख रहे थे. उनके सपनों में एक विशालकाय पतंग उड़ी जा रही और शेखचिल्ली उसके ऊपर सवार थे. कितना आनंद आ रहा था आसमान में उड़ते हुए नीचे देखने में. हर चीज़ छोटी नज़र आ रही थी. तभी अम्मी की तेज़ आवाज ने उन्हें […]
शेखचिल्ली इस समय वही कर रहा था, जिसमें उसमें सबसे ज्यादा मज़ा आता था- पतंगबाज़ी . वो इस समय अपने घर की छत पर खड़ा था और आसमान में लाल-हरी पतंगों के उड़ने का मजा ले रहा था. शेख की कल्पना भी उड़ान भरने लगी. वह सोचने लगा- काश मैं इतना छोटा होता कि पतंग […]