आषाढ़ का महीना था। वर्षों बाद गाँव में आषाढ़ के महीने का आनन्द लेने का मौका मिला था। बादलों का उमड़ना-घुमड़ना, सूखी धरती पर बिछी हरियाली, कभी तेज फुहार, ठंडी हवाओं के झोंके, हवा के झोंको के साथ बगुलों का पंक्तिबद्ध उड़ना, खेती-बारी के कार्यों में आई तेजी से किसानों की व्यस्तता, हलवाहों का बैलों […]
लोक नृत्य, लोकगीत आदिवासी जन-जीवन को उल्लसित करने का एक सर्वोत्तम माध्यम है। नृत्य, संगीत आदिवासी जीवन के रग-रग में, पल-पल में रचा बसा है। हर प्रांत के जन-जातीय जीवन में कमोबेश यही स्थिति पाई जाती है। छोटा नागपुर की कुडुख (उरांव) जनजाति भी इससे अछूती नहीं है। यहां के लोकगीतों में, विभिन्न कार्यक्रमों में […]
फिल्म शोले में एक डायलॉग जबरदस्त मशहूर हुआ था- ” इलाके में 50 मील के अंदर जब भी कोई बच्चा रोता है तो मां कहती है- “चुप हो जा बेटे, वरना गब्बर सिंह आ जाएगा।” इतना आतंक था गब्बर सिंह डाकू का। गब्बर सिंह आतंक का प्रर्याय बन गया था। गांव देहात में बच्चों के […]
यह किसी कुंवारी लड़की का नाम नहीं है पर लगता है जैसे किसी फिरंगी मेम का नाम हो। मोबाईल जगत में यह बहुत ही चालू एवं प्रचलित नाम है जो जन-जन की जुबान पर है। यह वास्तव में ‘‘मिस्ड कॉल‘‘ है परंतु इसका बिगड़ा रूप ‘‘मिस कॉल‘‘ ही चलन में है। आज मोबाईल हर घर […]
यूं तो नमक एक खाद्य पदार्थ है या खाद्य पदार्थों को स्वाद बख्शने वाली चीज है, लेकिन इसकी महत्ता सर्वविदित है । नमक का महत्व इंसान की जिंदगी में इतना ज्यादा है कि इसे लेकर ‘‘नमकहलाल’’, ‘‘नमकहराम’’ और ‘‘नमकख्वार’’ जैसी उपमाएं बनीं । महात्मा गांधी जी को भी ‘‘गांधी’’, उनके नमक कानून तोड़ने को लेकर […]
छोटानागपुर क्षेत्र की अधिकांश जनजातियाँ ईसाई धर्म की ओर उन्मुख हो चुकी हैं। जनजाति युवाओं को बतौर पुरोहिताई कार्य के लिए सेमिनरी यानी गुरुकुल में प्रशिक्षण की व्यवस्था है और इन केंद्रों में अध्ययन का बड़ा आकर्षण है। ईसाई पादरी बनना एक उपलब्धि के साथ सम्मान की बात है। इन्हीं पादरी बनने के प्रशिक्षण केन्द्रों […]
कोरोया फूल छोटानागपुर की वादियों में बहुतायत रूप में पाया जाता है, यह एक जंगली फूल है, और यह छोटानागपुर वासियों के लोक गीतों में भी रच बस गया है। कहानी, एक आदिवासी अधिकारी के गैर आदिवासी कन्या से विवाह और उनसे उत्पन्न समस्याओं और सांस्कृतिक जटिलताओं का चित्रण प्रस्तुत करती है । मैं अपने […]