नींद उचट जाती है – नरेंद्र शर्मा

जब-तब नींद उचट जाती है पर क्‍या नींद उचट जाने से रात किसी की कट जाती है? देख-देख दु:स्‍वप्‍न भयंकर, चौंक-चौंक उठता हूँ डरकर; पर भीतर के दु:स्‍वप्‍नों से अधिक भयावह है तम बाहर! आती नहीं उषा, बस केवल आने की आहट आती है! देख अँधेरा नयन दूखते, दुश्चिंता में प्राण सूखते! सन्‍नाटा गहरा हो […]

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