Skip to content

खूनी औरत का सात खून – दसवाँ परिच्छेद

0 0 votes
Article Rating

साया

भ्रूचातुर्यात्कुष्चिताक्षाः कटाक्षाः

स्निग्धा वाचो लज्जितांताश्च हासाः |

लीलामंदं प्रस्थितं च स्थितं च

स्त्रीणां एतद्भूषणं चायुधं च ‖

                                                        (भ्रतृहरि:)

बस, इतने ही में कालू आ पहुँचा और मेरी खाट के पास बैठ,  हँसकर यों कहने लगा,–“क्यों प्यारी दुलारी! मैंने कैसे अच्छे ढंग से अपने साथियों को यहाँ से हटाया?”
मैं बोली,–“किन्तु इस झूठ का नतीजा क्या होगा?”

   वह कहने लगा,–“यह बात पीछे सोची जायेगी। इस बखत तो उन सभों को यहाँ से टाल दिया न! जो यह बात मुझे न सूझती, तो वे तीनों भला, यहाँ से कभी टलने वाले थे! अच्छा, अब तुम्हें जो कुछ कहना-सुनना हो, उसे झटपट कह डालो; क्योंकि रात बीती चली जा रही है।”

   यह सुनकर मैंने उसकी ओर हँसकर देखा और स्त्रियों के स्वाभाविक अस्त्र-शस्त्रों का कुछ थोड़ा-सा प्रयोग करके उससे यों कहा,–“कालू, यद्यपि तुम पर अभी तक मैंने यह बात प्रगट नहीं की थी, क्योंकि मेरे माता-पिता जीते थे, पर यह तुम सच जानो कि मैं भी जी ही जी में तुम्हें चाहने लगी थी।”

    यों कहकर मैंने फिर जरा सा मुस्करा दिया,जिससे वह मुंआ बिलकुल घायल हो गया और मेरी ओर बड़ी बेचैनी के साथ देखकर यों कहने लगा,–“ऐं, यह क्या तुम सच कह रही हो?”

    मैंने खांस कर कहा,–“हाँ, बिलकुल ही सच!!!”

    वह कहने लगा,–“तब तो यह बड़ी ही खुशी की बात हुई!”

    मैं बोली,–“लेकिन मेरे लिये तो यह बड़ी दुखदाई बात हुई!”

    वह कहने लगा,–“तुम्हारी इस बात का क्या मतलब है?”

    मैं बोली,–“मतलब तो बिल्कुल साफ ही साफ है। अर्थात, मैं केवल तुमको चाहती हूँ, इसलिये फकत तुम्हारी ही होकर रहना भी पसंद करती हूँ। सो, यदि तुम भी मुझे सच्चे जी से प्यार करते होओ, तो मुझे तुम अपनी जोरू की तरह रक्खो, पंचायती रण्डी की भांति न रक्खो; क्योंकि मैं एक तुम्हारी ही होकर तो रह सकूँगी, पर तुम्हारे उन तीन-तीन यारों की टहल-चाकरी मुझसे कभी भी नहीं होने की।”

    मेरी ऐसी विचित्र बात को सुनकर वह मूरख उछल पड़ा और बोला,–“हाय, प्यारी दुलारी! तो तुमने अबतक यह अपने जी की बात मुझपर क्यों नहीं जाहिर की थी! अच्छा, कुछ पर्वा नहीं, तुम्हारा सारा मतलब मैं अब भली-भांति समझ गया। अब तुम जरा न घबराओ, क्योंकि अब तुमको सिर्फ मेरी घरवाली बनने के अलावे और किसी गैर साले की परछाईं भी नहीं छूनी पड़ेगी। बस, अब तुम कोई फिक्र न करो और थोड़ी देर तक यों ही पड़ी रहो। मैं अभी लौट कर आता हूँ और तुम्हें यहाँ से निकाल कर ले चलता हूँ।”

     यों कहकर कालू उठा और उस कोठरी के बाहर जाने लगा। यह देखकर मैंने उससे पूछा,–“तुम अब चले कहाँ?”

     वह कहने लगा,–“मैं उन तीनों को विदा करने जाता हूँ।”

     यह सुनकर मैंने बड़े अचरज के साथ उससे पूछा,–“ऐं, यह तुम क्या कहते हो? क्या ये तीनों तुम्हारे कहने से मुझे तुम्हारे हाथ में सौंप कर यहाँ से चुपचाप चले जायेंगे?”

     वह कहने लगा,–“उन सालों के सात पुरखे जायेंगे,फिर भला उनकी तो बिसात ही क्या है!”

      यह कहकर वह अपनी तलवार लिये हुए जब उस कोठरी के बाहर जाने लगा, तो मैंने फिर कहा,–“मेरे हाथ-पैर के बंधन तो खोलते जाओ।”

       यह सुन और यों कहकर वह तेजी के साथ मेरे सामने से चल दिया कि,–“नहीं, अभी ठहरो। मैं जब उन सालों को विदा करके लौटूँगा, तब तुम्हारे हाथ-पैर खोलूँगा, क्योंकि अगर अभी मैं तुम्हारे बंधन खोल दूँगा, तो शायद तुम मुझे अंगूठा दिखा कर कहीं खिसक लोगी।”

       बस, वह तो चला गया, पर मैं मन ही मन यों सोचने लगी कि यह कमबख़्त कालू अपने उन तीनों यारों को कैसे यहाँ से विदा करेगा! और साथ ही यह भी मैं विचारने लगी कि इस जबरदस्त कालू से मैं क्यों कर अपना पिण्ड छुड़ाऊँगी! मैंने तो मन-ही-मन यह सोचकर कालू से वह बात कही थी कि, ‘यदि वह थोड़ी देर के लिये मेरे पास अकेले में रह जाये तो मैं उसे फुसलाकर अपने हाथ-पैर खुलवा लूँ और तब मौका पाकर यहाँ से भागूँ,’ पर मेरा मन-चीता न हो सका और मैं उसी खाट पर पड़ी रही। पड़ी तो रही, पर पड़ी-पड़ी भी मैं अपने हाथ में बंधे हुए चीथड़े को दांतों से नोचने लगी। इस काम में मुझे परमेश्वर ने बड़ी सहायता दी; क्योंकि हाथ के बंधन को मैंने दांतों से काट-काट कर खोल डाला और तब मैं उठकर खाट पर बैठ गई। ठीक उसी समय मुझे ऐसा जान पड़ा, मानो रसोईघर में कुछ लड़ाई-झगड़ा हो रहा है! अस्तु, मैं फिर उधर ध्यान न देकर जल्दी-जल्दी अपने पैर का बंधन खोलने लगी। परन्तु इसमें मुझे कुछ देर लगी, क्योंकि वह बंधन रस्सी का था और बड़ी पोढ़ी गांठ लगाई गई थी। किन्तु फिर भी मुझसे जहाँ तक हो सका, मैंने अपने पैरों का बंधन भी खोल डाला और तब खाट के नीचे उतर कर अपने कुलदेवता को प्रणाम किया।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
सभी टिप्पणियाँ देखें