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नंदी की चोरी – तीसरे स्थान पर चयनित हल

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धर्मपाल ने चकित होकर पूछा, “किसने?”
अनिल शर्मा ने मुसकुराते हुए मालविका परिंदा को देखा, और कहा, “मालविका जी, मूर्ति आप स्वयं पेश करेंगी, या फिर हमें पूरे घर की तलाशी लेनी पड़ेगी? हमें पता है कि मूर्ति अभी घर पर ही है।“
मालविका पहले चौकी, फिर उसका चेहरा गुस्से में लाल हो गया।
“आप होश में तो है? आप जानते है कि आप क्या बकवास कर रहे है?”
“ऐसे बेहूदा इल्जाम लगाने का अंजाम सही नहीं होगा! मेरे नंदी को खोजने कि बजाय यहाँ हम पर ही इल्जाम लगाने का क्या मतलब है?” देवीप्रसाद ने भी अपना गुस्सा जाहिर किया।
अनिल शर्मा ने देवीप्रसाद को उत्तर देते हुये कहा, “देवीप्रसाद जी, इस मूर्ति का चोर सिर्फ आप और आपकी पत्नी हो सकते है, और कोई नहीं। और जैसा कि आप लोगों ने बताया कि आप मूवी देख रहे थे, यह काम सिर्फ आपकी पत्नी कर सकती थी।“
तभी थाने से भेजे गए लोग भी पहुँच गए। अनिल शर्मा ने अपना कथन जारी रखा। “आज मूसलाधार बारिश हो रही है। हमारे आते ही यहाँ का फर्श गीला हो गया। पर हमारे आने से पहले एकदम साफ और सूखा था। यदि राजेश मखीजा अंदर आया होता, तो फर्श अवश्य गीला होता। अब इतनी महंगी मूर्ति खोने के बाद आपका ध्यान फर्श साफ करने पर तो नहीं गया होगा। और यदि आपने फर्श साफ किया होता, तो देवीप्रसाद जी को अवश्य पता चलता। क्यों देवीप्रसाद जी?”
देवीप्रसाद का सर नकारात्मक रूप से हिला, फिर उन्होंने मालविका की ओर देखा, मालविका ने अपनी नजारे झुका ली। उसने सोफ़े के अंदर से नंदी कि मूर्ति निकाल कर अनिल शर्मा को दे दी।
“मुझे पैसे का लालच नहीं है, पर आज हमारे पास आपके इलाज के लिए पैसे नहीं बचे है। आपकी जिद है कि आप अपनी एक भी वस्तु बेचना नहीं चाहते। मेरे पास सिर्फ यही एक चारा रह गया था। मुझे माफ कर दीजिये। पर यदि जल्दी ही पैसे का इंतजाम नहीं किया गया, तो आप अधिक दिनों तक…..”, कहते कहते उसकी आवाज भर्रा गई।
चोरी कि रिपोर्ट नहीं लिखी गई, देवीप्रसाद ने राजेश मखीजा और पुलिस से माफी मांग ली थी। उन्होंने स्वयं भी मालविका को माफ कर दिया था। साथ ही अगले दिन अपने पुराने एजेंट से बात कर कुछ एंटिक को बेचने का निश्चय भी कर लिया था। अनिल शर्मा और धर्मपाल वापस अपने अड्डे पर पहुँच चुके थे। बारिश बंद हो चुकी थी, और पूर्व दिशा में हल्की लालिमा उभरने लगी थी। अनिल सिगरेट के कश लगता सोच रहा था कि प्यार में दिल चुराना तो सुना था, पर आज प्यार में मूर्ति चुराना भी देख लिया।
[कहानी में 2 जगह मूर्ति का मूल्य 30-40 लाख बताया गया है, परंतु इंश्योरेंस 30 करोड़ का बताया गया है। पहले मैंने कहानी का अंत इसके आधार पर बनाने का सोचा था, पर बाद में अलग तरह से लिखा। मुझे नहीं पता कि यह प्रूफ कि गलती से हुआ है, या फिर जानबूझकर।]

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