किसी देश की संसद में एक दिन बड़ी हलचल मची. हलचल का कारण कोई राजनीतिक समस्या नहीं थी, बल्कि यह था कि एक मंत्री का अचानक मुंडन हो गया था. कल तक उनके सिर पर लंबे घुँघराले बाल थे, मगर रात में उनका अचानक मुंडन हो गया था. सदस्यों में कानाफूसी हो रही थी कि […]
धर्मराज लाखों वर्षो से असंख्य आदमियों को कर्म और सिफारिश के आधार पर स्वर्ग और नरक में निवास-स्थान अलाट करते आ रहे थे.पर ऐसा कभी नहीं हुआ था. सामने बैठे चित्रगुप्त बार-बार चश्मा पोंछ, बार-बार थूक से पन्ने पलट, रजिस्टर देख रहे थे.गलती पकड में ही नहीं आ रही थी. आखिर उन्होंने खीझकर रजिस्टर इतनी […]
रात को बड़े जोर का अंधड़ चला. सेक्रेटेरिएट के लॉन में जामुन का एक पेड़ गिर पडा. सुबह जब माली ने देखा तो उसे मालूम हुआ कि पेड़ के नीचे एक आदमी दबा पड़ा है. माली दौड़ा दौड़ा चपरासी के पास गया, चपरासी दौड़ा दौड़ा क्लर्क के पास गया, क्लर्क दौड़ा दौड़ा सुपरिन्टेंडेंट के पास […]
कितनी अफ़सोसनाक, कितनी दर्दभरी बात है कि वही औरत जो कभी हमारे पहलू में बसती थी, उसी के पहलू में चुभने के लिए हमारा तेज खंजर बेचैन हो रहा है. जिसकी आंखें हमारे लिए अमृत के छलकते हुए प्याले थीं, वही आंखें हमारे दिल में आग और तूफान पैदा करें! रूप उसी वक्त तक राहत […]
अपने जमाने से जीवनलाल का अनोखा संबंध था। जमाना उनका दोस्त और दुश्मन एक साथ था। उनका बड़े से बड़ा निंदक एक जगह पर उनकी प्रशंसा करने के लिए बाध्य था और दूसरी ओर उन पर अपनी जान निसार करनेवाला उनका बड़े से बड़ा प्रशंसक किसी ने किसी बात के लिए उनकी निंदा करने से […]
अगर कबरी बिल्ली घर-भर में किसी से प्रेम करती थी, तो रामू की बहू से, और अगर रामू की बहू घर-भर में किसी से घृणा करती थी, तो कबरी बिल्ली से। रामू की बहू, दो महीने हुए मायके से प्रथम बार ससुराल आई थी, पति की प्यारी और सास की दुलारी, चौदह वर्ष की बालिका। […]
1 जनवरी, 1935 आज क्रिकेट मैच में मुझे जितनी निराशा हुई मैं उसे व्यक्त नहीं कर हार सकता। हमारी टीम दुश्मनों से कहीं ज्यादा मजबूत था मगर हमें हार हुई और वे लोग जीत का डंका बजाते हुए ट्राफी उड़ा ले गये। क्यों? सिर्फ इसलिए कि हमारे यहां नेतृत्व के लिए योग्यता शर्त नही। हम […]
भीत-सी आंखों वाली उस दुर्बल, छोटी और अपने-आप ही सिमटी-सी बालिका पर दृष्टि डाल कर मैंने सामने बैठे सज्जन को, उनका भरा हुआ प्रवेशपत्र लौटाते हुए कहा- ‘आपने आयु ठीक नहीं भरी है। ठीक कर दीजिए, नहीं तो पीछे कठिनाई पड़ेगी।’ ‘नहीं, यह तो गत आषाढ़ में चौदह की हो चुकी’ सुनकर मैंने कुछ विस्मित […]
नानी बिल्कुल अनपढ़। अस्सी के ऊपर आयु होगी, लेकिन अँग्रेजी के कुछ शब्द उसे आते हैं—जैसे कि रिफ्यूजी, जिसे वह रफूजी बोलती है। कुछ शब्द इतिहास की उपज होते हैं, जो प्रतिदिन की जिन्दगी का हिस्सा बन जाते हैं। ये शब्द राजा अथवा रानी की देन होते हैं। अँग्रेज़ जाते-जाते बँटवारा करा गये और विरासत […]