दर्द दिया जो तूने कितना अच्छा लगता है, आँखों का खारा पानी भी मीठा लगता है । धब्बों वाला चाँद नहीं, तेरा सुन्दर मुखड़ा, सुबह सुबह का सूरज घर में उतरा लगता है। यह जो नीला अम्बर है, तेरे शर्माने से, कहीं गुलाबी ना हो जाए ऐसा लगता है । तू गुलशन में पहुँचेगी तो […]
यूं तो खुशियाँ उभर रही थीं हसरत में, मगर गमों के अक्स बन गए उल्फत में। राह चाह की, आह तलक ही जाती है, अक्सर ऐसा क्यूँ होता है चाहत में। अहसासों में कब तक दर्द छुपे रहते, नज़र आ गए सभी ग़ज़ल की रंगत में। मन्नत है उनकी आँखों में बस जाएँ, इससे बढ़कर […]
डर गईं अमराइयां भी आम बौराए नहीं, ख़ूब सींचा बाग हमने फूल मुस्काए नहीं। यार को है प्यार केवल जंग से, हथियार से, मुहब्बत के रंग मेरे यार को भाए नहीं। मंज़िलों के वास्ते खुदगर्जियाँ हैं इस कदर , हमसफ़र को गिराने में दोस्त शर्माए नहीं । रोज सिमटी जा रही हैं उल्फतों की चादरें […]