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विश्व का प्रथम साम्यवादी —— हरिशंकर परसाई

जिस दिन राम रावण को परास्त करके अयोध्या आए , सारा नगर दीपों से जगमगा उठा . यह दीपावली पर्व अनंत काल तक मनाया जाएगा . पर इसी पर्व पर व्यापारी खाता -बही बदलते हैं और खाता-बही लाल कपडे में बाँधी जाती है .
प्रश्न है – राम के अयोध्या आगमन से खाता -बही बदलने का क्या संबंध ? और खाता -बही लाल कपडे में ही क्यों बाँधी जाती है ?
बात यह हुई कि जब राम के आने का समाचार आया तो व्यापारी वर्ग में खलबली मच गयी . 

वे कहने लगे – सेठजी , अब बड़ी आफत है .शत्रुघ्न के राज में तो पोल चल गयी . पर राम मर्यादा-पुरुषोत्तम हैं . वे सेल्स टैक्स और इनकम टैक्स की चोरी बर्दाश्त नहीं करेंगे .वे अपने खाता-बही की जाँच कराएंगे और अपने को सजा होगी .

एक व्यापारी ने कहा – भैया , तब तो अपना नंबर दो का मामला भी पकड़ लिया जाएगा .
अयोध्या के नर -नारी तो राम के स्वागत की तैयारी कर रहे थे , मगर व्यापारी वर्ग घबडा रहा था .
अयोध्या पहुँचने के पहले ही राम को मालूम हो गया था कि उधर बड़ी पोल है . उन्होंने हनुमान को बुलाकर कहा – सुनो पवनसुत , युद्ध तो हम जीत गए लंका में , पर अयोध्या में हमें रावण से बड़े शत्रु का सामना करना पड़ेगा – वह है , व्यापारी वर्ग का भ्रष्टाचार . बड़े – बड़े वीर व्यापारी के सामने परास्त हो जाते हैं .तुम अतुलित बल – बुद्धि निधान हो . मैं तुम्हे ‘एनफोर्समेंट ब्रांच ‘ का डायरेक्टर नियुक्त करता हूँ . तुम अयोध्या पहुँचकर व्यापारियों की खाता -बहियों की जाँच करो और झूठे हिसाब पकड़ो . सख्त से सख्त सजा दो .

इधर व्यापारियों में हडकंप मच गया . कहने लगे – अरे भैया , अब तो मरे . हनुमान जी एनफोर्समेंट ब्रांच के डायरेक्टर नियुक्त हो गए . बड़े कठोर आदमी हैं . शादी -ब्याह नहीं किया . न बाल , न बच्चे . घूस भी नहीं चलेगी .
व्यापारियों के कानूनी सलाहकार बैठकर विचार करने लगे . उन्होंने तय किया कि खाता – बही बदल देना चाहिए . सारे राज्य में ‘ चेंबर ऑफ़ कामर्स ‘ की तरफ से आदेश चला गया कि ऐन दीपोत्सव पर खाता-बही बदल दिए जाएँ .

फिर भी व्यापारी वर्ग निश्चिन्त नहीं हुआ .हनुमान को धोखा देना आसान बात नहीं थी . वे अलौकिक बुद्धि संपन्न थे . उन्हें खुश कैसे किया जाए ? चर्चा चल पड़ी –
– कुछ मुट्ठी गरम करने से काम नहीं चलेगा ?
– वे एक पैसा नहीं लेते .
– वे न लें , पर मेम साब ?
– उनकी मेम साब ही नहीं हैं . साहब ने ‘मैरिज ‘ नहीं की . जवानी लड़ाई में काट दी .
-कुछ और शौक तो होंगे ? दारु और बाकी सब कुछ ?
– वे बाल ब्रह्मचारी हैं . काल गर्ल को मारकर भगा देंगे . कोई नशा नहीं करते . संयमी आदमी हैं .
– तो क्या करें ?
– तुम्ही बताओ , क्या करें ?
किसी सयाने वकील ने सलाह दी – देखो , जो जितना बड़ा होता है वह उतना ही चापलूसी पसंद होता है . हनुमान की कोई माया नहीं है . वे सिन्दूर शरीर पर लपेटते हैं और लाल लंगोट पहनते हैं . वे सर्वहारा हैं और सर्वहारा के नेता . उन्हें खुश करना आसान है . व्यापारी खाता – बही लाल कपड़ों में बाँध कर रखें .
रातों-रात खाते बदले गए और खाता -बहियों को लाल कपडे में बाँधा गया .
अयोध्या जगमगा उठी . राम-सीता-लक्ष्मण की आरती उतारी गई . व्यापारी वर्ग ने भी खुलकर स्वागत किया . वे हनुमान को घेरे हुए उनकी जय भी बोलते रहे .
दूसरे दिन हनुमान कुछ दरोगाओं को लेकर अयोध्या के बाज़ार में निकल पड़े .
पहले व्यापारी के पास गए . बोले – खाता -बही निकालो . जाँच होगी .
व्यापारी ने लाल बस्ता निकालकर आगे रख दिया . हनुमान ने देखा – लंगोट का और बस्ते का कपड़ा एक है . खुश हुए ;
बोले – मेरे लंगोट के कपडे में खता-बही बाँधते हो ?
व्यापारी ने कहा – हाँ , बल-बुद्धि निधान , हम आपके भक्त हैं . आपकी पूजा करते हैं . आपके निशान को अपना निशान मानते हैं .
हनुमान गद्गद हो गए .
व्यापारी ने कहा – बस्ता खोलूँ . हिसाब की जाँच कर लीजिये .
हनुमान ने कहा – रहने दो। मेरा भक्त बेईमान नहीं हो सकता .
हनुमान जहाँ भी जाते , लाल लंगोट के कपडे में बंधे खाता-बही देखते . वे बहुत खुश हुए . उन्होंने किसी हिसाब की जांच नहीं की .
रामचंद्र को रिपोर्ट दी कि अयोध्या के व्यापारी बड़े ईमानदार हैं . उनके हिसाब बिलकुल ठीक हैं .
हनुमान विश्व के प्रथम साम्यवादी थे . वे सर्वहारा के नेता थे . उन्ही का लाल रंग आज के साम्यवादियों ने लिया है .
पर सर्वहारा के नेता को सावधान रहना चाहिए कि उसके लंगोट से बुर्जुआ अपने खता-बही न बाँध लें .

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