दिव्या का नारी विमर्श

पढ़ें सिर्फ: 10 मिनट में यशपाल ने दिव्या को ‘बौद्धकालीन उपन्यास’ कहा है, अगर इससे यह भ्रम न उत्पन्न हो कि उपन्यास की रचना बौद्धकाल में हुई है, तो यह मानना पड़ेगा कि दिव्या का परिवेश बौद्धकालीन है। उपन्यास की प्रारम्भिक कथा भूमि मद्र गणराज्य की राजधानी सागल (शाकल) नगरी है, जिसकी समता आज के स्यालकोट से स्थापित की जाती […]

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