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जूते- कुंदन यादव की कहानी

जूते

डाक्टरी की लंबी पढ़ाई और इंटर्नशिप आदि पूरी करने और दिल्ली के एक बड़े निजी  अस्पताल में दो साल की प्रैक्टिस करने के बाद सरकारी डॉक्टर के तौर पर सार्थक की पहली तैनाती आगरा की बाह तहसील के एक ग्रामसभा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हुई। उसके साथ ही उसकी सहपाठी और अब मंगेतर डॉ नेहा ने भी पास के ब्लॉक के अस्पताल में अपनी तैनाती ले ली थी। सप्ताह में एकाध बार दोनों मिलते और अन्य डॉक्टरों के साथ लंच और कुछ न कुछ खेलकूद या पार्टी वगैरह का आयोजन करते। एक दिन पास के सरकारी स्कूल से प्रधानाचार्य और दो शिक्षक उसके दफ्तर में आए। वे शिक्षक दिवस के दिन सार्थक को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करना चाहते थे। सार्थक ने सहर्ष स्वीकृति दे दी । शिक्षक दिवस के दिन स्कूल के कार्यक्रम में उसे बच्चों के बीच बहुत आनंद आया। उसने देखा कि अब सरकारी

फूलचंद का स्कूटर- कुंदन यादव की कहानी

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      फूलचंद ठेकेदार दोपहर का भोजन करके सोने के बाद उठे, घड़ी की तरफ देखा. साढ़े तीन बजने वाले थे. उन्होंने जल्दी से चेहरा धोया और सुँघनी मंजन करते हुए घर से बाहर चबूतरे पर आए. मंजन करते हुए जब दाईं तरफ नज़र गई तो देखा स्कूटर नहीं था. थोड़ी देर में उनको अपनी निर्माणाधीन साइट पर जाना था . कुल्ला करके मुंह धोते हुए भीतर आए और पत्नी से पूछा राजू स्कूटर ले गया है क्या? पत्नी ने कहा नहीं वो तो ऊपर सो रहा है. चूंकि छोटा बेटा राजू स्कूटर बाइक आदि चलाना सीख ही रहा था इसलिए गाहे बगाहे वो स्कूटर लेकर गायब हो जाता. बेटी रीना टीवी देख रही थी. उन्होंने उससे भी स्कूटर की बाबत भी पूछा कि कोई मांग तो नहीं ले गया , लेकिन कोई सकारात्मक जवाब न देख वे चिंतित हो उठे. नीचे आकर कुर्ता पाजामा पहन बाहर निकले थे

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