आप यहाँ हैं
होम > काव्य संसार > शहीदों की चिताओं पर- जगदम्बा प्रसाद मिश्र ‘हितैषी’

शहीदों की चिताओं पर- जगदम्बा प्रसाद मिश्र ‘हितैषी’

उरूजे कामयाबी पर कभी हिन्दोस्तां होगा |

रिहा सैय्याद के हाथों से अपना आशियां होगा ||

चखाएंगे मजा बर्बादिये गुलशन का गुलचीं को |

बहार आ जाएगी उस दम जब अपना बागबां होगा ||

ये आए दिन की छेड़ अच्छी नहीं ऐ खंजरे क़ातिल |

पता कब फैसला उनके हमारे दरम्यां होगा ||

जुदा मत हो मेरे पहलू से ऐ दर्दे वतन हर्गिज़ |

न जाने बाद मुर्दन मैं कहाँ और तू कहाँ होगा ||

वतन की आबरू का पास देखें कौन करता है |

सुना है आज मकतल में हमारा इम्तहां होगा ||

शहीदों की चिताओं पर जुड़ेंगे हर बरस मेले |

वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा ||

कभी वह भी दिन आएगा जब अपना राज देखेंगे|

जब अपनी ही जमीं होगी और अपना आसमां होगा ||

 

 

(Visited 22 times, 1 visits today)

Leave a Reply

यू पी एस सी - हिन्दी साहित्य कोचिंग के लिए संपर्क करें - 8800695993-94-95 या और जानकारी प्राप्त करें 

Top
%d bloggers like this: