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प्रलोभन

“महामायासमा नारी महामायामयी स्मृता।

गच्छन्ति केऽस्या मायाया: पारं भुवि नरा मुने॥”

                                (देवोभागवते)

     उस इशारे को समझकर कालू तुरन्त मेरी खाट के पास आकर बैठ गया और बोला,–“कहो, क्या कहती हो?”

     मैने पूछा,–“यह सब क्या हो रहा है और तुम सब यहाँ पर क्यों इकट्ठे हो रहे हो?”

     मेरी बात सुन कर कालू कहने लगा,–“दुलारी, यह सब जो कुछ तुम देख रही हो, उसका असली सबब तुम्हारी अनूठी सुन्दरता ही है। सुनो दुलारी, तीन-चार बरस से इस गाँव भर में तुम्हारे अनोखे रूप की धूम सी मच गई है और यहाँ के बहुतेरे आदमी तुम पर मरने लगे हैं। यों तो इस गाँव के सैकड़ों आदमी ये तुम्हारे रूप पर जान दिए बैठे हैं, पर उनमें से हम-सब बारह जने ऐसे तुम पर लट्टू हुए हैं कि हमलोगों ने मिलकर एक गोठ (गोष्ठी-सभा) बनाई है और उसमें नित्य हमलोग इकट्ठे होते और है तुम्हारे रूप का बखान कर-कर के अपने-अपने जी को बहलाते हैं। उन बारह आदमियों के नाम ये हैं, जिन्हें तुम जरूर ही जानती होगी- 1. नब्बू जुलाहा, 2. धाना कोइरी, 3. परसा कहार, 4. मैं कालू कुर्मी, 5. यह मरा हुआ हिरवा नाऊ, 6. घीसू बनिया, 7. बहादुर दूबे, 8. तिनकौड़ी कांदू  9. हेमू भड़भूँजा, 10. कतलू महाबाम्हन, 11. रासू चमार और 12. लालू हलवाई। यों तो इस गाँव के सैकड़ों ही  आदमी तुम पर जी जान से निछावर हो रहे हैं, पर हम बारह जने धीरे-धीरे आपस में मिले और हमने अपनी एक जमात कायम की। फिर तो लालू हलवाई की चौपाल (बैठक) में हमलोग रोज रात को इकट्ठे होने लगे और बराबर इस बात की सलाह आपस में करने लगे कि ‘क्योंकर हम-सब तुम्हें हथियावें।’  एक बात यहाँ पर और भी समझ लो,–वह यह है कि यद्यपि इस जमात में सभी जात के लोग आ मिले हैं, पर हम-सब आपस में इस तरह घी-खिचड़ी की तरह मिल गए हैं कि जात-पांत का बखेड़ा हमलोगों ने उठा दिया है और हम सब एक-साथ मिलकर खाते-पीते हैं। हमलोगों में मांस-मछली और दारू-शराब का भी बराव नहीं है। खैर, सुनती चलो। जब तुम्हारी माँ मर गईं, तब हमलोगों को बड़ी खुशी हुई और हमसभों ने आपस में यह सलाह की कि, ‘अब तुम्हारे बाप को किसी तरह से खपा डालना और तुमपर अपना कब्जा करना चाहिए।’ किन्तु भगवान ने ऐसा बानक बना दिया कि हमलोग खून-खराबा करने से बच गए और तुम्हारे बाप ने आप ही मर कर हम लोगों का रास्ता साफ कर दिया। बस, तुम्हारे बाप के मरते ही हमलोगों ने आपस में एक सलाह पक्की कर डाली। फिर तो हम चारों तुम्हारे हरवाहे तुम्हारे बाप को उठाकर ले गए और गङ्गा में डालकर लौट पड़े। उस समय तुम भी वहीं मिली थी, पर बेहोश होकर वहीं गिर गई थी। खैर, फिर तो हम चारों जने तुम्हें यहाँ उठा लाए और इसी चारपाई पर तुम्हें डाल कर इस घर से बाहर निकले। तुम्हारे तीन चरवाहों को तो, जो कि मेरे मेल में नहीं आए थे, कुछ इधर-उधर की समझा-बुझा कर मैंने यहाँ से टाल दिया और जब वे तीनों अपने-अपने घर चले गए, तो हमलोगों ने हिरवा की माँ को तुम्हारी चौकसी के लिये यहाँ बैठा दिया और तुम्हारे सारे घर की तलाशी लेनी शुरू की। थोड़ी ही देर में हमलोग तुम्हारे घर की सब चीज-बस्त उठा ले गए, पर जब इन सब चीजों को ठिकाने से रखकर लौटे तो तुम्हारे मकान के सदर दरवाजे पर हिरवा की हुलसिया मिली। उसने हमलोगों से यों कहा कि, ‘तुम सब जल्दी भीतर जाओ, क्योंकि दुलारी जाग पड़ी है और उसने हिरवा को पछाड़ कर उसका गला दबा लिया है।’ यह सुनकर हमलोगों ने उसे तो उसके घर विदा कर दिया और चटपट मैंने तुम्हारे घर की भूसा ढोने वाली गाड़ी में तुम्हारे ही दो बैल जोत कर तुम्हें यहाँ से भगा ले जाने का विचार किया। जब गाड़ी ठीक हो गई और हमलोग भी तैयार हो गए, तो नब्बू ने एक पलीता बाल लिया और हम सब इस कोठरी में आए। यहाँ आकर हम लोगों ने क्या देखा कि, ‘हिरवा तो मरा हुआ पड़ा है और उसी के पास तुम भी बेसुध पड़ी हुई हो!’ यह हाल देखकर हमलोग बड़े चकपकाए कि तुम्हारे नाजुक हाथों ने उस हट्टे-कट्ठे पट्ठे हिरवा की जान कैसे ले डाली! खैर, फिर तो खुद मैंने तुम्हें उठाकर इसी चारपाई पर डाल दिया और साथ ही तुम्हारे हाथों और पैरों को भी मजबूती के साथ कसकर बाँध दिया। बस, यही तो असल बात थी, जिसे मैंने तुम्हें सुना दिया। अब यह कहो, कि तुम्हारा क्या इरादा है? तुम सीधी तरह हमलोगों के साथ चलोगी, या जोर-जबर्दस्ती करने से?”

     कालू की इस ढब की बातें सुनकर मैं काँप उठी, बहुत ही डर गई और मन ही मन यही बात सोचने लगी कि अब मेरी खैर नहीं है! पर फिर भी मन ही मन भगवान का स्मरण करके मैंने कोई बात ठीक की और कालू की ओर देखकर यों कहा,–“तो तुम्हारे बतलाए हुए और बाकी के सात साथी कहाँ हैं?”

      यह सुनकर कालू ने कहा,–“वे सब प्लेग के डर से इधर-उधर भाग गए हैं। इस समय हम पाँच ही आदमी इस गाँव में रह गए थे, जिनमें से हिरवा बेचारे को तो तुमने गला घोंट कर मार ही डाला! बस, अब हम्ही चार यार हैं, जो तुम्हें अभी—इसी दम यहाँ से कहीं दूसरी जगह ले जाया चाहते हैं। यदि तुम राजी-खुशी से चलो, तब तो बहुत ही अच्छी बात है; पर जो तुम यों न मानोगी और हल्ला-गुल्ला करोगी, तो हमलोग बरजोरी तुम्हें यहाँ से घसीट ले जायेंगे। बस, जो कुछ तुम्हारा इरादा हो, उसे जल्द कह डालो; क्योंकि रात पिछले पहर के पास पहुँच गई है, इसलिये अब हमलोग जादे देर तक यहाँ ठहर कर अपने काम को बिगाड़ना नहीं चाहते।”

       कालू की काल-समान बातें सुनकर मेरा कलेजा दहल उठा, पर फिर भी सर्व-भय-नाशिनी भगवती दुर्गा का स्मरण करके मैंने कालू से कहा,–“सुनो भाई, यदि एक बात का जवाब तुम मुझे ठीक-ठीक दे दो, तो मैं अभी—बिना उजुर तुम्हारे साथ चली चलूँ।”

        मेरी बात सुन कर मानो उन सभी शैतानों ने आकाश का चाँद पा लिया और सब के सब एक साथ बोल उठे कि,– “कहो, कहो,जल्द कहो; तुम जो कुछ कहा चाहती हो, झटपट कह डालो।”

        उन सभों की बातों का रंगढंग देखकर मुझे कुछ आशा हुई और मैंने स्त्रियों की प्रलयंकारी माया का विस्तार करना प्रारम्भ किया। मैंने कहा—“सुनो भाई, हिरवा को मैंने जानबूझ कर नहीं मारा, पर वह मुर्दार आखिर मर ही गया! ऐसी अवस्था में जबकि हिरवा का मुर्दा घर में पड़ा हुआ है, मुझे यहाँ से कहीं न कहीं भागना ही पड़ेगा। तो फिर जब कि तुमलोग मुझे यहाँ से कहीं ले ही चल रहे हो, तो बस इससे बढ़ कर और कौन सी अच्छी बात हो सकती है! अब रही यह बात कि तुमने जो अपने बारह साथियों की मण्डली बतलाई है, उनमें से एक हिरवा तो मर ही गया, और सात जने यहाँ से भागे ही हुए हैं। ऐसी अवस्था में अब यदि तुम केवल चार ही जने मुझे अपनी बनाओ और फिर किसी पाँचवें का मुझे मुँह न देखना पड़े तो मैं राजी से तुम लोगों के साथ जा सकती हूँ।”

       मेरी ऐसी बातें सुनकर वे चारों पापी मारे आनन्द के उछलने कूदने लगे और पारी-पारी से बार-बार सभी जने यों कहने लगे कि,–“नहीं, प्यारी, दुलारी! अब हम चार यारों के अलावे पाँचवां कोई भी साला तुम्हारी परछाईं भी नहीं छू सकेगा।”

       यह सुन कर मैं मन ही मन बहुत ही प्रसन्न हुई; क्योंकि उन बारह बदमाशों में से एक हिरवा तो मर ही चुका था, और सात उस समय भागे हुए थे। बस, अब उन चार दुष्टों से ही मुझे अपना पल्ला छुड़ाना था। सो, जब मैंने यह देखा कि मेरे चकमे का असर इन पाजियों पर हो रहा है, तब मैंने मन ही मन भगवान्‌ को प्रणाम करके अपने छुटकारे का यह उपाय सोचा कि यदि इन चारों में से तीन शैतान किसी तरह और अलग किए जा सकें, तो फिर मैं कालू को समझ लूँगी। क्योंकि वह (कालू) मेरे यहाँ  तीन-चार बरस से रह रहा था, इसलिये उसके स्वभाव से मैं खूब अच्छी तरह जानकार हो चुकी थी। वह बड़ा ताकतवर और पूरा  उजडु था, और उस अकेले को चकमे में डाल कर मुझे अपने को बचा लेना कुछ कठिन काम न था। बस, यही सब सोचसाचकर फिर तो मैंने स्त्रियों के स्वाभाविक अस्त्र-शस्त्रों की थोड़ी सी वर्षा करनी प्रारम्भ की और बहुत ही धीरे से,जिसमें कि वे तीनों न सुन सकें, कालू के कान में इतना ही कहा कि, —“अब जरा इन तीनों को यहाँ से हटा दो तो मैं तुमसे कुछ कहूँ।”

      यद्यपि मेरी बातें तो वे तीनों न सुन सके, पर कालू के कान में जो मैंने कुछ कहा, इसे देखकर वे तीनों के तीनों कालू से बार-बार यों पूछने लगे कि, “दुलारी ने तुमसे अभी हौले-हौले क्या कहा? देखो भाई, जो कुछ इसने तुम्हारे कान में कहा हो, उसे हमलोगों पर भी प्रगट कर दो; क्योंकि हम चार यारों में अब परस्पर कुछ भी छिपाव न रहना चाहिए।”

      कालू ने उन तीनों की बातें सुनकर उन (तीनों) से एक ऐसी विचित्र बात कही कि जिसे सुनकर मैं तो दंग रह गई! क्योंकि वह बात मैंने कालू से नहीं कही थी, जो उस (कालू) ने अपने तीनों साथियों से कही।

      तो, उसने अपने साथियों से क्या कहा? एक अद्भुत बात कही! वह बात यह थी–कालू ने अपने तीनों साथियों से यों कहा कि,– “नहीं, दोस्तों! मैं तुमलोगों से कुछ भी नहीं छिपाना चाहता। लो, सुनो, -दुलारी यह कहती है कि, ‘उस पच्छिम ओर वाले रसोईघर में चूल्हे के नीचे एक बटुआ गड़ा हुआ है, जिसमें दो हजार रुपए हैं। सो, उन रुपयों को भी निकाल कर अपने साथ ले लेना चाहिए।”

       बस, महाशय। वह बात यही थी, जिसे अपने मन से गढ़कर कालू ने उन तीनों से कहा था और जिसे सुनकर मैं बहुत ही चकपकाई थी कि, ‘वाह, इस (कालू) ने अपने तीनों साथियों को यहाँ से हटाने का यह अच्छा ढंग निकाला! पर इस युक्ति- बिल्कुल बेजोड़ युक्ति का परिणाम क्या होगा, इसे मैं उस समय नहीं समझ सकी थी।

       सो, जब उन तीनों ने कालू के मुँह से दो हजार रुपए की बात सुनी, तब वे मारे आनन्द के खूब ही उछलने-कूदने लगे। यह देखकर कालू उठा और बाहर से एक दूसरा दीया लाकर और उसे बालकर आले पर रखने के बाद अपने उन तीनों साथियों के साथ मेरी कोठरी से निकल कर रसोई घर की ओर चला गया। कुछ ही क्षण के बाद मेरे कानों में फरसे के चलाए जाने की आवाज पहुँची, जिसे सुनते ही मैंने यह समझ लिया कि रसोई घर के चूल्हे के नीचे की धरती खोदी जा रही है!

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