2 Comments

  1. boinwad krushna
    October 28, 2018 @ 4:32 pm

    आदरणीय महाशय , आपसे कहते हुए हर्ष हो रहा हैं की आपने क्या व्याख्या की ,जरुरु आपने नहीं पढ़ा हैं ‘मैला आँचल’ यदि पढ़ा भी होगा लेकिन मार्मिकता एवम तार्किकता तथा संवेदन्शीलता से नहीं | महाशय आप यदि हिंदी के मूल पाठक हैं तो आपसे ‘गंवार’ शब्द उपयोग नहीं लाना था यदि आप उस उपन्यास से समझ नहीं पाए तो कृपया जन ले , अन्यथा इस तरह का लेखन कर नवाग्तुंग पाठक वर्ग के मस्तिष्क भूसा ना भरे | धन्यावद

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    • Rajiv
      October 29, 2018 @ 8:00 pm

      आदरणीय महाशय, मैंने मैला आँचल पढ़ा है…कई बार, लेकिन मुझे आपकी टिप्पणी का उत्तर देते हुए कोई हर्ष नहीं हो रहा है…क्योंकि आपने टिप्पणी करने से पहले पोस्ट को पूरा पढ़ने का कष्ट नहीं किया.अगर पूरा पढ़ा होता, तो यह भी पढ़ते कि यह एक विज्ञापन है, जो स्वयं रेणु जी ने तैयार किया था.

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