राजीव सिन्हा

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम. ए. और एम. फिल. करने के पश्चात् दिल्ली में अध्यापन . साहित्य के अतिरिक्त भारतीय इतिहास और संस्कृति में विशेष रूचि

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अतिथि
विक्की

बाप रे रोवाँ कन कना गया कोई शब्द नही बहुत अजीब लगा पढ़ के 😢 काश वो मिल जाती उसको वापस क्या ऐसा कुछ नही हो सकता था
कैसा रहा होगा वो समय …😢😢
कहानी दिल छु दिया😕😟

अतिथि

मार्मिक… आज़ादी के वक्त में हुए बंटवारे ने कई जिंदगियों को तबाह किया..कई ताहिरा और कई सुधा बंट कर रह गई… दिल को छू जाने वाली कहानी…..

अतिथि
आनंद कुमार सिंह

दिल को छू लेने वाली कहानी

अतिथि
Amit Wadhwani

शिवानी जी की एक और सुंदर रचना, हर पात्र का चरित्रचित्रण अद्भुत और अविस्मरणीय, ‘हे बिल्वेश्वर महादेव, तुम्हारे चरणों में यह हीरे की अँगूठी चढ़ाऊँगी, एक बार उन्हें दिखा दो पर वे मुझे न देखें. ‘ इस एक संवाद ने ताहिरा को पूर्ण रूप से बयान कर दिया।
इतनी सुंदर कहानी से परिचय करवाने के लिए राजीव रंजन जी का तहेदिल आभार।

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