4 Comments

  1. विक्की
    September 22, 2018 @ 4:19 am

    बाप रे रोवाँ कन कना गया कोई शब्द नही बहुत अजीब लगा पढ़ के 😢 काश वो मिल जाती उसको वापस क्या ऐसा कुछ नही हो सकता था
    कैसा रहा होगा वो समय …😢😢
    कहानी दिल छु दिया😕😟

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  2. विकास नैनवाल
    September 22, 2018 @ 9:41 am

    मार्मिक… आज़ादी के वक्त में हुए बंटवारे ने कई जिंदगियों को तबाह किया..कई ताहिरा और कई सुधा बंट कर रह गई… दिल को छू जाने वाली कहानी…..

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  3. आनंद कुमार सिंह
    September 22, 2018 @ 10:05 am

    दिल को छू लेने वाली कहानी

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  4. Amit Wadhwani
    September 22, 2018 @ 12:56 pm

    शिवानी जी की एक और सुंदर रचना, हर पात्र का चरित्रचित्रण अद्भुत और अविस्मरणीय, ‘हे बिल्वेश्वर महादेव, तुम्हारे चरणों में यह हीरे की अँगूठी चढ़ाऊँगी, एक बार उन्हें दिखा दो पर वे मुझे न देखें. ‘ इस एक संवाद ने ताहिरा को पूर्ण रूप से बयान कर दिया।
    इतनी सुंदर कहानी से परिचय करवाने के लिए राजीव रंजन जी का तहेदिल आभार।

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