सिद्धार्थ अरोड़ा 'सहर' यूँ तो रहते दिल्ली में हैं, लेकिन अपने घर 'अमृतसर' से कभी अपना हाथ छुड़ा नहीं पाए । दिल्ली में पले-बढ़े सिद्धार्थ ने लिखने की शुरूआत करने से पहले क्राइम राइटिंग के बादशाह 'श्री सुरेंद्र मोहन पाठक' को घोट कर पढ़ने से करी । सिद्धार्थ आठवीं से पाठक साहब को पढ़ रहे हैं । फिर अचानक इनका मन साहित्य की तरफ भागा । उसके बाद से 'गुलज़ार साहब' को सुनने से ज्यादा पढ़ना शुरू कर दिया । अक्सर नई किताबें खरीद कर पढ़नी शुरू कर देते हैं, अगर आधी पढ़ने के बाद समझ न आए या पसंद न आए तो वहीं छोड़ कर दूसरी किताब पढ़ने लग जाते हैं । किताबें पढ़ते पढ़ते जाने क्या सूझी कि खुद एक नॉवेल लिखनी शुरू कर दी । आने वाले समय में क्या बनना चाहते हैं ये बताना तो मुश्किल है पर लिखना चाहते हैं, ये पक्का है चाहें वो किसी भी श्रेणी में हो । फ़िलहाल प्राइवेट नौकरी बजा रहे हैं और सरकारी से दूरी बनाए हुए हैं । किस्से कहानियों के अलावा कुछ एक फ़िल्मी/किताबी रिव्यु भी लिखते हैं ।

14 Comments

  1. mahendra singh
    May 3, 2018 @ 10:30 pm

    चट्टान के हृदय में भी मीठे जल सोता छुपा रहता है ज़रूरत किसी के पुरुषार्थ की होती है उसे प्रकट करने के निमित्त बनने की
    अंतरतम गहरे दफन हो चुकी कोमल मानवीय भावनाओं को सहज स्वाभाविक रूप से प्रकट करने के लिए लेखक बधाई के पात्र हैं

    Reply

    • Sidd
      May 4, 2018 @ 9:46 am

      बहुत बहुत शुक्रिया महेंद्र जी।

      Reply

  2. Rajeev Roshan
    May 3, 2018 @ 10:43 pm

    सार्थक कहानी जो दिल को छू कर गुजर गई। कई दफा पढ़ने योग्य। कहानी की थीम और इसके संदेश ने पाठक तक जरूर पहुंच बनाई होगी। कहानी अंत तक पाठक को बांधे रखने में सक्षम है। लेखक से आगे भी ऐसी ही समसामयिक कहानी की उम्मीद रहेगी।

    Reply

    • Sidd
      May 4, 2018 @ 9:46 am

      लेखक आपका आभारी है राजीव जी। आपसे प्रेरणा लेकर ही अपना उपन्यास अधूरा छोड़े सामाजिक कहानियां लिख रहा है। लेखक आपको आदर्श मानता है। और नगर भी।

      Reply

  3. धर्मेंद्र त्यागी
    May 3, 2018 @ 11:12 pm

    बहुत अच्छी कहानी लेकिन आज के हालात से उलट एक नई सोच को उजागर करती हुई

    Reply

    • Sidd
      May 4, 2018 @ 9:44 am

      बिलकुल। आज इनमें से कोई भी पात्र बनना इम्पॉसिबल है। शुक्रिया

      Reply

  4. vickky
    May 3, 2018 @ 11:20 pm

    भावुक करता है बन्नो की स्थिति
    कहानी का अंत कैसा होगा डर था
    लेकिन सुखान्त रहा बहुत अच्छा लगा

    Reply

    • Sidd
      May 4, 2018 @ 9:43 am

      मेरी कोशिश यही होती है, फर्स्ट प्रायोरिटी है सुखद अंत। आपको कहानी पसंद आई इसका बहुत बहुत शुक्रिया

      Reply

  5. दिग्विजय सिंह
    May 4, 2018 @ 12:32 am

    वाह, शानदार, और क्या लिखूं कोई शब्द नही…..अक्का एक रात को सरोज बनी और अपनी कीमत में उम्र भर के लिए माँ बन गई, ये थी उन खामोश आंखों की चाहत, गज्जब लिखे सिड भाई, सलाम है आपको🙏🙏🙏

    Reply

  6. Sidd
    May 4, 2018 @ 9:43 am

    बहुत बहुत शुक्रिया डिगी भाई। 😊

    Reply

  7. Shakendra Singh
    May 4, 2018 @ 9:52 am

    एक बेहतरीन कहानी. लेखक ने एक बार फिर ये साबित कर दिया कि किसी मजबूरी वश वेश्या बनी हरेक औरत के सीने में एक दिल जरूर होता है, जिसको धंधे की मजबूरी की वजह से वो कितना भी छुपाये रहे, पर कभी कभी उस दिल से भी आवाज आती है. ऐसी हरेक औरत प्यार की भूखी होती है, बदले में वह भी सिर्फ प्यार की भाषा बोलना चाहती है. और यहां कोठा मालिक अक्का ने अपना प्यार बन्नो पर उंडेल दिया. शानदार.

    Reply

  8. आनंद कुमार सिंह
    May 4, 2018 @ 10:30 am

    बहुत ही शानदार। लेखक ने अपनी कलम से माहौल को जीवंत किया। पढ़ने वाला खुद को उसी माहौल में रचा बसा पाता है।

    Reply

  9. shobhit
    May 4, 2018 @ 1:25 pm

    बहुत बढ़िया कहानी.. हालाँकि मैं सामाजिक कहानियाँ कम पढता हूँ पर तब भी खूब मजा आया..

    Reply

  10. मनी चहल
    May 5, 2018 @ 6:00 am

    बुरा ना मानना सिद्धार्थ भाई मुझे यह कहानी पसंद नही आई।
    आप की और भी कहानियाँ पढी है आप काफी अचछा लिखते है। आशा है आप की क़लम से जल्दी ही कुछ बेहतरीन पढ़ने को मिलेगा।

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यू पी एस सी - हिन्दी साहित्य कोचिंग के लिए संपर्क करें - 8800695993-94-95 या और जानकारी प्राप्त करें