समाप्ति की कगार पर है जनजातियों का सरना धर्म

सरना धर्म

           मानवीय समाज में ऐसा कहीं नहीं मिला है जिसमें धर्म का अस्तित्व किसी न किसी रूप में न रहा हो या कोई भी मानव समाज धर्म से अलग रहा हो। धर्म सर्वत्र पाया जाता है। परंतु जनजातीय समाज में धर्म उतने ही सरल अथवा कहीं-कहीं उतने ही जटिल रूप में […]

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