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इस लेख को लिखते हुए, बहुत असमंजस की स्थिति में फंस गया हूँ। लेखकों के लिए इसे ही ‘राइटर्स ब्लाक’ का नाम दिया गया है। मेरे दिमाग में आईडिया है, एक सोच है लेकिन उसको कैसे बढ़ाना है, कैसे फैलाना है, कैसे उसे शुरू करना है, कैसे उसका अंत करना है, इस जगह पर रुक गया हूँ।

काल्पनिक कहानियों (फिक्शन स्टोरीज) को लिखने के लिए कोई ऐसा लिखित नियम नहीं है जिसको हर लेखक को फॉलो करना चाहिए। काल्पनिक कहानियों का संसार असीम है और इस विधा का लेखक पूरी तरह से आज़ाद होता है कि किसी भी तरफ़ इस कहानी को मोड़ सकता है, घुमा सकता है, शुरू कर सकता है और खत्म कर सकता है।

 

मौजूदा परिवेश में फेसबुक और ब्लॉगर जैसे प्लेटफार्म ने कई लेखकों को उभरने का मौका दिया हैI लेकिन इन प्लेटफार्म पर भी वही लेखक उभर पाते हैं जो प्रतिदिन लिखते हैं। आगे चलकर वे अपने लेखों को एक पुस्तक का रूप देकर – असली लेखन की दुनिया में पदार्पण करते हैं। ये जो आगे बढ़ पाते हैं – उनके पास कोई जादुई छड़ी नहीं होती है – वे बस अपने आपको और अपने कार्य को संजीदगी से लेते हैं। यही बात उन लेखकों पर भी लागू होती है जो उपन्यास लिखना चाहते हैं। कभी-कभी मित्र एवं परिवार के सदस्यों के तीखे व्यंग्य के कारण कई उभरते हुए लेखक अपना लेखन कार्य छोड़ देते हैं। मुख्यतः व्यंग तो यही होता है कि – लिखने से मिलता क्या है? हमारे मौजूदा समाज में – हर चीज – ‘मोनेटरी कम्पेरिजन’ पर आधारित हो गयी है। ऐसे मौके पर उभरते हुए लेखकों को यही सलाह है कि वे अपने परिजनों एवं मित्रों को बताएं कि ‘लेखन’ आपका कोई पास्ट-टाइम (समय बिताने वाला) कार्य नहीं है बल्कि आपका ‘पैशन’ है। एक लेखक के लिए अपने जीवन में यह महत्वपूर्ण नहीं कि वह कितना पैसा अपने लेखन से पीटता है, बल्कि महत्व इस बात का है कि  उसके जीवन में लेखन कितना इम्पोर्टेन्ट है।

 

वर्तमान परिवेश में देखा जा रहा है कि लेखन ‘ट्रेंड’ आधारित हो चुका है जबकि उभरते हुए लेखकों को अपने पैशन, अपनी रूचि के ही अनुसार लिखना चाहिए। ‘ट्रेंड’ ने आपको मजबूर नहीं किया हुआ है कि आप उसी आधार पर लिखें। भारत में मौजूदा ट्रेंड ‘रोमांस’ और ‘माइथोलॉजी’ का चल रहा है लेकिन आपकी रूचि किस विधा में है, यह मायने रखता है। अगर आपको ‘क्राइम फिक्शन’ पसंद है तो उसमे लिखिए, अगर आपको ‘हिस्टोरिकल फिक्शन’ पसंद है तो उसमे लिखिए, क्यूँ ट्रेंड को फॉलो करना? अपनी पसंद की विधा में लिखने से आप उस कहानी की अंतरात्मा तक अपनी पहुँच बना पाते हैं।

 

अगर आप अच्छे फिक्शन लेखक बनाना चाहते हैं तो अपनी लेखन की निरंतरता को बरक़रार रखिये। रुकिए मत, डरिये मत, हिचकिचाइए मत – आपके सामने कई प्रकार की रुकावटें आएँगी लेकिन उन रुकावटों को पार करके आप लिखते रहिये। आप चाहें तो अपनी निरंतरता को बरक़रार रखने के लिए अपना टाइम-टेबल भी बना सकते हैं और जब टाइम-टेबल बना लें तो उसको निरंतर फॉलो भी करते रहें।

 

कई मशहूर लेखक कह चुके हैं कि अगर आप एक अच्छे पाठक हैं तो आप अच्छा लेखक बन सकते हैं। अर्थात लेखन कार्य में शौक रखने वाले व्यक्ति को किताबें पढ़ने में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए| आप सिर्फ अपनी विधा के लेखन के पठन-पाठन तक ही सीमित  न रहें, बल्कि दूसरी विधाओं के लेखन को भी पढ़ें .इससे आपको प्रेरणा और शिक्षा भी मिलती रहेगी। कई लेखकों को अक्सर नया आईडिया दूसरे लेखकों के लेखन को पढ़ कर भी आ जाता है। हाल ही में, मैंने कहीं पढ़ा कि क्राइम फिक्शन के पुरोधा लेखक एडगर एलन पो को उनकी प्रसिद्ध रचना ‘द रेवन’ के लिए प्रेरणा प्रसिद्ध लेखक चार्ल्स डिकेंस की कहानी ‘Barnaby Rudge’ से मिली। ऐसे कई उदाहरण आपको पढ़ने को मिल जायेंगे।

 

एक लेखक के अन्दर की समालोचनात्मक क्षमता उसके लेखन को और निखारती है और इसका सबसे बेहतरीन तरीका है कि आप अपनी रचना को समालोचना की कसौटी पर परखें। इस तरह से आप अपने लेखन के बारे में अधिक जान पायेंगे और ‘गिरते स्तर के लेखन’ से दूर रह सकते हैं चाहे वह आपकी हो या दूसरों की। वहीं जब भी आपको अपने लेखन पर, आपके पाठकों द्वारा कोई आलोचना प्राप्त हो तो उसे सकारात्मक रूप में लें और अगर सुझाव हों तो उसे अपने लेखन के सुधार में प्रयोग करें।

 

ऊपर मैंने ‘राइटर्स ब्लाक’ शब्द का प्रयोग किया है और उसे परिभाषित भी किया है। ‘राइटर्स ब्लाक’ का एक उदाहरण आप उस समय भी देख सकते हैं जब कोई कहानी लिखते-लिखते आप उसे अधूरा छोड़ देते हैं, क्योंकि उसे कैसे आगे बढ़ाना है, आप समझ नहीं पाते हैं। तो इस ‘राइटर्स ब्लाक’ से घबराने की कोई जरूरत नहीं है। ‘राइटर्स ब्लाक’ से भी बड़ी चीज जो लेखकों के लिए परेशानी का सबब बनती है, वह है – पब्लिशिंग हाउस द्वारा रिजेक्शन। उभरते हुए लेखकों को अपने लेखन कार्य के लिए ‘पब्लिशिंग हाउस द्वारा रिजेक्शन’ का तमगा मिलना, एक हतोत्साही क्रिया है लेकिन इस हतोत्साहन से लेखकों को घबराने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। जहाँ आज के समय में ‘सेल्फ-पब्लिशिंग’ और ‘ई-बुक’ एक आप्शन के रूप में सभी के सामने है, वहीं इस क्रिया से कुछ स्थापित लेखकों को भी गुजरना पड़ता है। इसलिए उभरते हुए लेखकों को इन दोनों रुकावटों से टकराने की आदत डाल लेनी चाहिए। अगर आपकी रचना किसी ‘पब्लिशिंग हाउस द्वारा रिजेक्ट’ कर दी जाती है तो आपको चाहिए कि अपनी रचना को फिर दोबारा  एक बार देखें और जानने की कोशिश करें कि क्या, कहाँ और क्यों कमी रह गयी थी।

 

आपकी रचना भले ही कितनी भी ‘परफेक्ट’ क्यों न हो, उसे मरम्मत की जरूरत पड़ती ही है। इस क्रिया में सबसे पहला कार्य – लेखक का ही होता है कि वह अपनी रचना को दो-तीन बार पढ़े और उसमे मौजूद विसंगतियों को दूर करे। ये विसंगतियां व्याकरण, वर्तनी त्रुटियाँ, कहानी का प्रारूप एवं घटनाओं के तालमेल से सम्बंधित हो सकती हैं। आपका काम समाप्त होने के बाद ‘सम्पादक’ का काम शुरू होता है। सम्पादक दो प्रकार के हो सकते हैं – व्यक्तिगत एवं पेशेवर। व्यक्तिगत सम्पादक, वे हो सकते हैं जो आपके करीबी हों या आपके मित्र हों, जिन्हें आपने अपनी रचना एडिटिंग करने के लिए दी हो और वे आपको अपने ज्ञान के अनुसार, उस रचना में कई प्रकार के बदलाव को सुझा दें। जब आप अपनी रचना को किसी पब्लिशिंग हाउस में देंगे तब आपकी रचना सबसे पहले उस पब्लिशिंग हाउस की ‘संपादकीय टीम’ के पास जायेगी। वे आपकी कहानी को पढ़कर कई प्रकार की विसंगतियों एवं बदलाव की ओर इशारा करेंगे, जिनका ज्ञान उन्हें ‘बुक पब्लिशिंग’ के संसार में अपने अनुभव के द्वारा प्राप्त हुआ है। आपको अपने दोनों ही संपादकों पर भरोसा करना होगा।

 

जिस असमंजस की स्थिति से मैंने इस लेख को शुरू किया था, लगता है वह खत्म हो चुका  है। मेरे शब्दों ने ही मेरे अन्दर के ‘राइटर्स ब्लाक’ रूपी रुकावट को खत्म कर दिया है। एक बात सभी लेखकों को जान लेना चाहिए कि – बुक पब्लिशिंग एक ऐसा ट्रेड है – जहाँ कोई भी ट्रेंड निश्चित नहीं है। कभी-कभी ऐसी रचनाएं भी समय से आगे की प्रसिद्धि हासिल कर जाती हैं,जिन्हें कई प्रकाशकों एवं संपादकों द्वारा नकार दिया गया था – उदाहरण स्वरुप – ‘द गॉडफादर’ और ‘Immortals of Meluha’ तो अपने अन्दर, अपने लेखन के लिए, अपनी प्रवृति का विकास कीजिये और उसमे इतना विश्वास रखिये जितना कोई दूसरा भी न रखे। इसका अर्थ यह नहीं है कि अगर आपको सुझाव मिले तो उस पर अमल मत कीजिये, बल्कि इसका अर्थ यह है कि जो भी निर्णय आपने लिया है उसके बारे में निश्चित रहिये।

 

#लिखते_रहिये_पढ़ते_रहिये

 

राजीव रोशन

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