6 Comments

  1. dinesh charan
    October 1, 2017 @ 5:38 pm

    वाहजी

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  2. विकास नैनवाल
    October 2, 2017 @ 4:46 am

    वाह! मज़ा आ गया। बचपन में ये कहानी पढ़ी थी। आज भी उतनी ही रोचक है जितनी उस वक्त थी। शुक्रिया इसे ऑनलाइन लाने के लिए।

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  3. Ankit Shrivastava
    October 2, 2017 @ 1:23 pm

    Pahli Baar ye kahaniyon padhi bahut acchi lagi…

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  4. abhishek kumar
    January 4, 2018 @ 6:08 pm

    सुदर्शन पंडित द्वारा लिखित एक उत्कृष्ट कहानी।पढ़कर मजा आ गया।

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  5. nirbhay kumar
    January 31, 2018 @ 6:30 am

    Very good

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  6. nirbhay kumar
    January 31, 2018 @ 12:01 pm

    This is a very nice story

    Reply

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