4 Comments

  1. विकास नैनवाल
    August 1, 2018 @ 11:31 am

    वाह!! रोमांचक संस्मरण। आखिर हार के जीतने वाले को ही बाजीगर कहते हैं। आपने भी बाज़ीगरी दिखा ही दी। उम्मीद है ऐसे ही लेख आगे भी आते रहेंगे।

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    • Rajiv
      August 3, 2018 @ 4:50 pm

      धन्यवाद… कोशिश रहेगी…

      Reply

  2. Alok verma
    August 1, 2018 @ 3:46 pm

    बेहद खूबसूरत संस्मरण। वाह वाह

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    • Rajiv
      August 3, 2018 @ 4:50 pm

      धन्यवाद…

      Reply

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