भारत माता ग्रामवासिनी। खेतों में फैला है श्यामल, धूल भरा मैला सा आँचल, गंगा यमुना में आँसू जल, मिट्टी कि प्रतिमा उदासिनी। दैन्य जड़ित अपलक नत चितवन, अधरों में चिर नीरव रोदन, युग युग के तम से विषण्ण मन, वह अपने घर में प्रवासिनी। तीस कोटि संतान नग्न तन, अर्ध क्षुधित, शोषित, निरस्त्र जन, मूढ़, […]
गर्मी के दिन थे। बादशाह ने उसी फाल्गुन में सलीमा से नई शादी की थी। सल्तनत के सब झंझटों से दूर रहकर नई दुलहिन के साथ प्रेम और आनन्द की कलोलें करने, वह सलीमा को लेकर कश्मीर के दौलतखाने में चले आए थे। रात दूध में नहा रही थी। दूर के पहाड़ों की चोटियाँ बर्फ […]
सन् 1908 ई. की बात है। दिसंबर का आखीर या जनवरी का प्रारंभ होगा। चिल्ला जाड़ा पड़ रहा था। दो-चार दिन पूर्व कुछ बूँदा-बाँदी हो गई थी, इसलिए शीत की भयंकरता और भी बढ़ गई थी। सायंकाल के साढ़े तीन या चार बजे होंगे। कई साथियों के साथ मैं झरबेरी के बेर तोड़-तोड़कर खा रहा था कि गाँव के पास से एक आदमी […]
“उस उमस एवं गर्मी से भरी मई के महीने में, शाम ५ बजे, सुब्रोजित बासु उर्फ़ मिकी, तीसरे क़त्ल की तैयारी कर रहा था| क़त्ल करते रहना कितना ख़तरनाक हो सकता था, उसे इस बात का पूरी तरह से एहसास था|” प्रतियोगिता के नियम
हीरासिंह का पापभवन छोड़कर महापापी भोलाराय सड़क में जाते-जाते सोचने लगा- अब पापियों के साथ नहीं रहूँगा, पाप में भी नहीं रहूँगा। पंछीबाग – मेरा रहने का स्थान- मेरे पापों की निशानी है उसे आज मैं अपने हाथों से जलाकर चला जाऊँगा, अपनी बाकी उमर आजतक किये हुए महापाप के प्रायश्चित में बिताऊँगा। चालीस वर्ष […]
वह इलाका पालम थाने के अंतर्गत आता था। वहाँ से दो हवलदार और थाना इंचार्ज त्यागी आए थे। बाहर अभी भी बारिश हो रही थी। सभी ने अपनी-अपनी गीली जैकेटें उतारी और उसी कुर्सी पर रख दीं। अनिल शर्मा ने उनका अभिवादन किया और ड्राइंग रूम में बैठने का इशारा किया। वहाँ उन दोनों के […]
अपराध और अपराधी, दोनों ही क्राइम-डिटेक्शन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। क्राइम डिटेक्शन में अपराधी का कैसे पता लगाये जाए, यह जानना बहुत जरूरी है। अपराध-स्थल से मिलने वाला एक सुराग भी पुलिस या डिटेक्टिव को संदिग्ध व्यक्ति तक पहुँचाने में सहायता प्रदान करता है। ये सुराग पुलिस को, अपराध को री-कंसट्रक्ट करने में भी सहायता […]
धर्मपाल ने चकित होकर पूछा, “किसने?” अनिल शर्मा ने मुसकुराते हुए मालविका परिंदा को देखा, और कहा, “मालविका जी, मूर्ति आप स्वयं पेश करेंगी, या फिर हमें पूरे घर की तलाशी लेनी पड़ेगी? हमें पता है कि मूर्ति अभी घर पर ही है।“ मालविका पहले चौकी, फिर उसका चेहरा गुस्से में लाल हो गया। “आप […]
नवमी के दिन हीरासिंह के घरवाले एक साथ स्नान करने चले गये हैं। अकेला हीरासिंह शिकार से चुके हुए शेर की तरह भयंकर मूर्ती धारण किये बैठक में टहल रहा है। सोचता है- लतीफन कैसे भाग गई? उसे कौन निकाल ले गया? बाग़ का सुरंग तीन-चार आदमियों को छोड़कर और कोई नहीं जानता; जो लोग […]