कुंदन यादव भारतीय राजस्व सेवा के 2007 बैच के अधिकारी हैं. ठेठ बनारसी हैं या यूं कहें कि बनारस उनकी रगों में है. बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में डिग्रियां हासिल की है. सन 2003-04 में फुलब्राइट स्कॉलरशिप के तहत अमेरिका में विजिटिंग लेक्चरर के तौर पर इलिनॉय विश्वविद्यालय, शिकागो में हिंदी का अध्यापन भी कर चुके हैं। समकालीन स्थितियों पर मारक व्यंग्य उनके लेखन में दिखता है. संप्रति :- केंद्रीय प्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड नई दिल्ली में ज्वाइंट कमिश्नर पद पर कार्यरत संपर्क:-ईमेल :kundanyadav@gmail.com मोबाइल : 07905664743

15 Comments

  1. vickky
    May 5, 2018 @ 3:12 pm

    पूरा आवभगत होगया की कुछ तगादा नही किंहये
    बढ़िया कहानी👌👌👌
    अंतिम में 20 ₹ देना अच्छा लगा😍😍

    Reply

  2. आनंद कुमार सिंह
    May 5, 2018 @ 3:51 pm

    Mind blowing. लेखक को नमन। शब्द कम पड़ रहे हैं तारीफ में। बस इतना समझ लीजिए कि ऐसी लेखनी अरसे में कभी कभार आती है।

    Reply

    • Kundan Yadav
      May 5, 2018 @ 6:21 pm

      आपके शब्दों से अभिभूत हूं आनंद जी बहुत-बहुत शुक्रिया

      Reply

  3. alok verma
    May 5, 2018 @ 4:08 pm

    बेहतरीन जैसे सब कुछ हमारे सामने ही रहा था। इन पात्रों में खुद का अक्श दिखा

    Reply

  4. PARAMJIT
    May 5, 2018 @ 4:31 pm

    क्या बात है I बिना रुके पढ़ता चला गया I एक एक प्रसंग दिल को छूने वाला I शानदार और गजब का प्रस्तुतीकरण I HATS OFF TO YOU SIR.

    Reply

  5. Hareesh Gupta
    May 5, 2018 @ 4:42 pm

    अच्छी कहानी। लेकिन इतने प्रयास के बाद भी तगादा न हुआ, आवाभगत का असर। सस्पेंस रह गया।

    Reply

    • Kundan Yadav
      May 5, 2018 @ 5:58 pm

      धन्यवाद हरीश जी अगर तगादा हो ही जाता तो फिर आवभगत किस बात की?

      Reply

  6. mahendra singh
    May 5, 2018 @ 5:23 pm

    बहुत अच्छी कहानी
    मुंशी जी की झलक मिलती है लेखन
    बहुत अरसे बाद ऐसी कहानी पढ़ने को मिली
    लेखक बधाई के पात्र हैं

    Reply

  7. Ganga Prasad
    May 5, 2018 @ 5:56 pm

    अति सुंदर । बनारस का ठेठ अन्दाज़, गँवाई संस्कृति , छोटी छोटी चीज़ों जैसे लोटा माँजना, चाय वाले को डाँटना, बंदूक़ पकड़ने के अन्दाज़ का बयान और चरखने की लूँगी मुर्ग़ा रखने का अन्दाज़। बहुत ख़ूब सब अलटेरन साहित्य का अनूठा उदाहरण ।।लिखते रहिए बहुत ख़ूब ।।

    Reply

  8. Puneet Kumar dubey
    May 5, 2018 @ 7:29 pm

    कहानी दिल को छू गई कहानी।

    Reply

  9. Ram jatan yadav
    May 6, 2018 @ 4:24 pm

    कहानी ने दिल को छू लिया पढ़ते समय लगा सब कुछ सामने ही घटित हो रहा भाषा का गजब बनारसी अंदाज।

    Reply

  10. Hitesh Rohilla
    May 8, 2018 @ 2:27 am

    Bahut badhiya likha janab. Padh k achcha lga.

    Reply

  11. Maya Yadav
    May 14, 2018 @ 10:32 pm

    Beautiful story, written in a beautiful way… pictorial description of aavbhagat a satire on the society..hats off to the author.

    Reply

  12. Maya Yadav
    May 14, 2018 @ 10:42 pm

    Of k baad aavbhagat h

    Reply

  13. Nishi kant
    May 18, 2018 @ 4:30 pm

    अति सुन्दर कहानी सर , पढ़ कर बहुत आनंद आया, आवाभगत का रोमांचित तरीका दिल को छू लिया

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यू पी एस सी - हिन्दी साहित्य कोचिंग के लिए संपर्क करें - 8800695993-94-95 या और जानकारी प्राप्त करें