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मैं जब भी व्यक्त हुआ

आधा ही हुआ

उसमें भी अधूरा ही समझा गया

उस अधूरे में भी

कुछ ऐसा होता रहा शामिल

जिसमें मैं नहीं दूसरे थे

जब उतरा समझ में

तो वह बिल्कुल वह नहीं था

जो मैंने किया था व्यक्त

इस तरह मैं अब तक

रहा हूँ अव्यक्त।

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आलोक मिश्रा

जन्म: 10 अगस्त 1984 शिक्षा- दिल्ली विश्वविद्यालय से एम ए (राजनीति विज्ञान), एम एड, एम फिल (शिक्षाशास्त्र) पेशा: अध्यापन रुचि- समसामयिक और शैक्षिक मुद्दों पर लेखन, कविता लेखन, कुछ पत्र पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित भी हो चुकी हैं जैसे-जनसत्ता, निवाण टाइम्स, शिक्षा विमर्श, कदम, कर्माबक्श, मगहर आदि में।
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